कानपुर में अगर 312 तालाब सुरक्षित होते तो गलियों में नहीं भरता बारिश का पानी : महापौर

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कानपुर में अगर 312 तालाब सुरक्षित होते तो गलियों में नहीं भरता बारिश का पानी : महापौर


कानपुर, 24 सितंबर (हि.स.)। शहर में बारिश के बाद हुए जलभराव को लेकर गुरुवार को कानपुर की महापौर प्रमिला पांडेय ने नगर निगम के साथ मंडलायुक्त, नगर आयुक्त और केडीए की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि शहर में दर्ज 312 तालाब अगर सुरक्षित होते तो बारिश का पानी सड़कों और मोहल्लों में भरने के बजाय इन्हीं जलस्रोतों में पहुंचता। उन्होंने मंडलायुक्त से तालाबों की मौजूदा स्थिति की जांच के लिए उच्चस्तरीय कमेटी गठित करने की मांग की।

महापौर ने प्रेस वार्ता में कहा कि अनियोजित विकास और तालाबों के खत्म होने से बारिश के पानी की निकासी और प्राकृतिक जल संचयन प्रभावित हुआ है। सरकारी अभिलेखों के अनुसार केडीए की पुरानी सीमा में शामिल 86 गांवों में 312 तालाब दर्ज हैं। उनका कहना है कि इनमें से कई तालाबों की जमीन पर मकान और अन्य निर्माण हो चुके हैं। ऐसे में बारिश के पानी को ठहरने के लिए प्राकृतिक जगह नहीं बच रही और इसका सीधा असर शहर में जलभराव के रूप में दिखाई दे रहा है।

महापौर ने केडीए वीसी, नगर आयुक्त और मंडलायुक्त से सवाल किया कि अभिलेखों में दर्ज 312 तालाब वर्तमान में किस स्थिति में हैं और इतने वर्षों में इनकी सुरक्षा को लेकर क्या कार्रवाई की गई। उन्होंने तालाबों की जमीन पर हुए अवैध कब्जों और निर्माण को चिह्नित कर तत्काल कार्रवाई करने की मांग की।

उन्होंने कहा कि सभी 312 तालाबों की ड्रोन और जीआईएस तकनीक से मैपिंग कराई जानी चाहिए। राजस्व अभिलेखों से मिलान कर यह पता लगाया जाए कि कौन से तालाब अस्तित्व में हैं और किन पर अतिक्रमण या निर्माण हुआ है। इसके आधार पर जिम्मेदारी तय करने की भी मांग की गई। महापौर ने कहा कि तालाबों के घटने का असर केवल जलभराव तक सीमित नहीं है, बल्कि भूजल स्तर पर भी पड़ रहा है। बारिश के पानी के प्राकृतिक संचयन की व्यवस्था मजबूत होने से भूजल को रिचार्ज करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने केडीए, नगर निगम और जिला प्रशासन के संयुक्त प्रयास से तालाबों के पुनर्स्थापन के लिए अभियान शुरू करने की मांग की।

महापौर ने कहा कि नगर निगम के पास विकास कार्यों के लिए बजट की कमी नहीं है। जरूरत के मुताबिक फंड उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि अगले वर्ष मानसून से पहले जलभराव से निपटने के लिए जरूरी व्यवस्थाएं पूरी की जा सकें। उन्होंने पूरे मामले की जानकारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी पत्र के माध्यम से देने की बात कही।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

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