बाढ़ प्रबंधन पर यूपी-मध्य प्रदेश के अधिकारियों ने किया मंथन

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बाढ़ प्रबंधन पर यूपी-मध्य प्रदेश के अधिकारियों ने किया मंथन


- संयुक्त अंतर्राज्यीय बाढ़ नियंत्रण समिति की बैठक में समय से सूचना साझा करने पर जोर

मीरजापुर, 11 जून (हि.स.)। वर्षा ऋतु में संभावित बाढ़ से जन-धन की सुरक्षा और प्रभावी बाढ़ प्रबंधन के लिए गुरुवार को अष्टभुजा निरीक्षण गृह में उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के अधिकारियों की संयुक्त अंतर्राज्यीय बाढ़ नियंत्रण समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक की सह-अध्यक्षता विंध्याचल मंडल के मंडलायुक्त राजेश प्रकाश एवं रीवा मंडल के मंडलायुक्त बी.एस. जामोद ने की।

बैठक में मेजा, अदवा और सिरसी जलाशयों से वर्षाकाल में छोड़े जाने वाले पानी तथा उससे उत्पन्न होने वाली बाढ़ की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। रीवा मंडल के मंडलायुक्त ने बताया कि टोंस और बेलन नदियों के किनारे स्थित कई क्षेत्र बाढ़ से प्रभावित होते हैं। उन्होंने कहा कि बांधों से पानी छोड़ने से पहले संबंधित अधिकारियों को व्हाट्सएप और दूरभाष के माध्यम से अनिवार्य रूप से सूचना दी जाए, ताकि समय रहते आवश्यक तैयारियां की जा सकें।

बैठक में यह भी सुझाव दिया गया कि मेजा और अदवा बांधों के पूर्ण भराव स्तर से लगभग दो मीटर पहले ही नियंत्रित तरीके से पानी छोड़ा जाए। इससे अचानक बाढ़ जैसी स्थिति बनने से रोका जा सकेगा। अधिकारियों ने बांधों से एक साथ अधिक मात्रा में पानी न छोड़ने और आपसी समन्वय बनाए रखने पर जोर दिया।

मंडलायुक्त राजेश प्रकाश ने कहा कि दोनों राज्यों के सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग लगातार संपर्क में रहें तथा वर्षा और जलस्तर से जुड़ी सूचनाओं का नियमित आदान-प्रदान करें। उन्होंने बाढ़ प्रभावित गांवों के प्रधानों, पुलिस कर्मियों और प्रशासनिक अधिकारियों को व्हाट्सएप समूहों से जोड़ने के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी पवन कुमार गंगवार ने आश्वस्त किया कि बांधों से पानी छोड़ने से पहले मध्य प्रदेश के अधिकारियों को सूचित किया जाएगा। बैठक में दोनों राज्यों के वरिष्ठ प्रशासनिक, पुलिस एवं सिंचाई विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / गिरजा शंकर मिश्रा

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