आलू का न्यूनतम दाम तय करने की मांग को लेकर हाथरस में किसानों ने शुरु किया अनशन
हाथरस, 23 जुलाई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश हाथरस में आलू के उचित दाम न मिलने और किसान विरोधी कानूनों के विरोध में किसानों ने अनशन शुरू कर दिया है। किसान कृष्णा खोकिया, अमित चौधरी और इंद्रजीत सिंह पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की प्रतिमा के समक्ष अनशन पर बैठे हैं। वे आलू का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करने और किसान विरोधी कानूनों को हटाने की मांग कर रहे हैं। किसान बुधवार शाम से अनशन पर बैठे हैं।
गुरुवार काे किसान कृष्णा खोकिया ने बताया कि आलू की फसल के दाम लगातार कम मिल रहे हैं, जिससे किसानों को लागत मूल्य भी नहीं मिल पा रहा है। इस कारण किसान आर्थिक रूप से टूटते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसान कर्ज लेकर आलू की फसल तैयार करते हैं। उन्हें उम्मीद होती है कि अच्छे दाम मिलने पर वे कर्ज चुका सकेंगे और अपने परिवार का भविष्य बेहतर बना पाएंगे। हालांकि, बाजार में आलू का उचित मूल्य न मिलने से किसान बर्बादी की कगार पर पहुंच गए हैं। किसानों ने बताया कि आलू उत्पादक लंबे समय से अपनी उपज के उचित मूल्य की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। लागत बढ़ने के बावजूद आलू के दाम न मिलने से किसानों पर कर्ज लगातार बढ़ रहा है। कर्जदारों के दबाव और आर्थिक तंगी के कारण उनकी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। किसानों ने सरकार से गेहूं, बाजरा और मक्का की तरह आलू का भी न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करने की मांग की।
किसानाें का कहना है कि इससे किसान अपनी उपज सीधे सरकार को बेच सकेंगे और उन्हें उचित मूल्य मिल पाएगा, जिससे बिचौलियों और बाजार की अनिश्चितता से राहत मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि किसानों की पार्टी सत्ता में होने के बावजूद आलू किसानों को सही मूल्य और समर्थन मूल्य दिलाने में असमर्थ है। अनशन पर बैठे किसानों ने किसान विरोधी कानूनों को वापस लेने की भी मांग की और चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / मदन मोहन राना

