वर्ष 2017 की ’ग्रेवयार्ड इकॉनमी’ से आज ‘टेंपल इकॉनमी’ बना यूपी: जयवीर सिंह
--ब्रज रंगोत्सव बना आस्था से आर्थिक पर्यटन का मॉडल, प्रमुख दिनों में टूटा रिकॉर्ड; 44 लाख से अधिक पर्यटकों ने मनाई होली
--जहां कभी सैफई में नृत्य महोत्सव होता था, आज ब्रज में ‘राधे-राधे’ की वैश्विक गूंज है : जयवीर सिंह
--टेंपल सर्किट से पर्यटन आय 300% बढ़ी, मथुरा-अयोध्या-काशी बन रहे आर्थिक केंद्र
--उप्र ब्रज तीर्थ विकास परिषद और पर्यटन विभाग के प्रयास से मथुरा में धार्मिक-सांस्कृतिक पर्यटन को नया आयाम
आगरा, 16 मार्च (हि.स.)। उत्तर प्रदेश में विकसित हो रही ‘टेंपल इकॉनमी’ अब पर्यटन और स्थानीय रोजगार का अहम आधार बनती जा रही है। तीर्थ स्थलों पर पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है और पर्यटन से जुड़ी सुविधाएं भी तेजी से विकसित हो रही हैं। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने सोमवार को कहा कि प्रदेश अब ‘ग्रेवयार्ड इकॉनमी’ से निकलकर मंदिर, तीर्थ और सांस्कृतिक आयोजनों पर आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ चुकी है। उन्होंने कहा कि पहले की सरकारें कब्रिस्तानों की दीवारों तक ही विकास सीमित रखती थीं, जबकि अब आस्था, त्योहार और संस्कृति के जरिए पर्यटन, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिल रहा है।
मंत्री ने बताया कि ब्रज रंगोत्सव 2026 के दौरान होली के प्रमुख दिनों में ही ब्रज क्षेत्र में 44 लाख से अधिक पर्यटक पहुंचे। इस दौरान लठमार होली, फूलों की होली, हुरंगा और मथुरा-वृंदावन के मंदिरों में होने वाले पारम्परिक आयोजन ने देश-विदेश के श्रद्धालुओं और पर्यटकों को खूब आकर्षित किया। अमेरिका, यूके, रूस और ब्राजील समेत कई देशों से भी लोग इन उत्सवों में शामिल होने आए।
--यूपी के प्रमुख तीर्थस्थलों को मिल रही वैश्विक पहचान
मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि, मथुरा-वृंदावन से लेकर अयोध्या और काशी तक उत्तर प्रदेश के प्रमुख तीर्थस्थल अब वैश्विक पहचान बना चुके हैं। वर्ष 2025 में अकेले मथुरा में लगभग 10.24 करोड़ पर्यटक और श्रद्धालु पहुंचे, जो प्रदेश में धार्मिक पर्यटन की तेजी से बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है। इसी तर्ज पर अब ब्रजधाम के समग्र विकास पर भी जोर दिया जा रहा है। ब्रज क्षेत्र में पर्यटन सुविधाओं और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए हाल ही में ब्रज तीर्थ विकास परिषद की बैठक में करीब 300 करोड़ रुपये के विकास कार्यों को मंजूरी दी गई है। इसके तहत मथुरा से वृंदावन के बीच 11.80 किलोमीटर लंबे फोरलेन मार्ग के निर्माण और आधुनिक पॉड रैपिड ट्रांजिट सिस्टम जैसे कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स पर काम आगे बढ़ाया जा रहा है।
--ब्रज क्षेत्र के विकास के लिए प्रतिबद्ध
उ०प्र० ब्रज तीर्थ विकास परिषद की स्थापना के साथ ही प्रदेश सरकार ने ब्रज क्षेत्र के समग्र विकास को प्राथमिकता देते हुए बजट में वृद्धि सुनिश्चित की है। परिषद के गठन के बाद से ही ब्रज क्षेत्र में आधारभूत ढांचे, तीर्थ स्थलों के संरक्षण और पर्यटन सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए बजट में निरंतर वृद्धि सुनिश्चित की गई है। वित्तीय वर्ष 2018-19 में 4387.91 लाख रुपए से आरम्भ हुई यह राशि 2019-20 में बढ़कर 12483.47 लाख रुपए पहुंची, जबकि 2020-21 में 5170 लाख रुपए और 2021-22 में 5500 लाख रुपए स्वीकृत किए गए। इसके बाद वित्तीय वर्ष 2022-23 में 6000 लाख रुपए, 2023-24 में 10000 लाख रुपए तथा वित्त वर्ष 2024-25 में 14000 लाख रुपए की स्वीकृति देकर राज्य सरकार ने ब्रज क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और सशक्त किया है।
--फरवरी-मार्च में तीन गुना तक बढ़े पर्यटक
मथुरा-वृंदावन सहित ब्रज क्षेत्र के सर्वांगीण विकास ने दुनिया भर के पर्यटकों को आकर्षित किया। भगवान कृष्ण की लीलाओं और राधा रानी के प्रेम को समर्पित ब्रज क्षेत्र में मंदिरों की वृहद श्रृंखला है। बांके बिहारी मंदिर, इस्कॉन मंदिर, प्रेम मंदिर, राधा रमण मंदिर, श्री रंगनाथ मंदिर, शाहजी मंदिर, गोविंद देव जी मंदिर, प्रियाकांत जू मंदिर, मदन मोहन मंदिर आदि ऐसे आस्था स्थल है जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। खास बात ये है कि फरवरी-मार्च में होने वाले रंगोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। आंकड़े इसकी गवाही दे रहे हैं। वर्ष 2016 में जहां फरवरी-मार्च के दौरान 19.90 लाख श्रद्धालु ब्रज धाम पहुंचे थे, वहीं 2023 में यह संख्या बढ़कर 33.26 लाख हो गई। 2024 में 44 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने दस्तक दी और 2025 में तो आंकड़ा 54 लाख के पार चला गया।
--विकास कार्यों से ब्रज क्षेत्र की बदल रही तस्वीर
उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ब्रज क्षेत्र के धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के विकास पर तेजी से कार्य कर रहा है। मथुरा–वृंदावन मार्ग स्थित मयूर (मोर) संरक्षण केंद्र के सौंदर्यीकरण, मथुरा परिक्रमा मार्ग के नवीनीकरण और पांच पवित्र कुंडों के जल शोधन व सौंदर्यीकरण जैसे कई प्रोजेक्ट तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। इसके अलावा गोवर्धन के ग्राम परासौली में सूरदास की समाधि परिसर के संरक्षण और अकबरपुर में पर्यटक सुविधा केंद्र का निर्माण भी लगभग पूरा होने की ओर है। इनके साथ ही मथुरा और वृंदावन के बीच बन रहा ऑडिटोरियम-कन्वेंशन हॉल भी अंतिम चरण में है। इन विकास कार्यों से ब्रज क्षेत्र में सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पर्यटन को नया आयाम मिलने की उम्मीद है।
--जैत गांव बना ‘वोकल फॉर लोकल’ का उदाहरण
‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान से स्थानीय उत्पादों की मांग बढ़ी है। मथुरा के जैत गांव में तुलसी माला निर्माण बड़ा रोजगार केंद्र बन गया है, जहां सैकड़ों लोग इससे जुड़कर आजीविका कमा रहे हैं। तीर्थ पर्यटन की बढ़ती गतिविधियों से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिली है। जैत की तुलसी मालाएं, परासौली के हस्तशिल्प और गोवर्धन का फूल बाजार रोजगार के नए अवसर पैदा कर रहे हैं। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार मथुरा, अयोध्या और काशी जैसे तीर्थ अब बेहतर कनेक्टिविटी और सुविधाओं के कारण आर्थिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र बनते जा रहे हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / Vivek Upadhyay

