विकसित भारत युवा संसद–2026 का जनपद स्तरीय आयोजन सम्पन्न

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विकसित भारत युवा संसद–2026 का जनपद स्तरीय आयोजन सम्पन्न


विकसित भारत युवा संसद–2026 का जनपद स्तरीय आयोजन सम्पन्न


गोरखपुर, 10 जनवरी (हि.स.)। महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय, गोरखपुर के तत्वावधान में राष्ट्रीय सेवा योजना के समस्त इकाईयों द्वारा कार्यक्रम समन्वयक डॉ धनञजय पाण्डेय के मार्गदर्शन में विकसित भारत युवा संसद–2026 का जनपद स्तरीय आयोजन विश्वविद्यालय परिसर में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का मुख्य विषय आपातकाल के 50 वर्ष भारतीय लोकतंत्र के लिए सीख रहा, जिसमें युवाओं ने लोकतांत्रिक मूल्यों पर गंभीर विमर्श प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर के. रामचन्द्र रेड्डी ने कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय है, जिसने हमें संविधान, स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों के महत्व का बोध कराया। युवाओं को इतिहास से सीख लेकर लोकतान्त्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए सजग रहना होगा। भारत को प्रगति पथ पर ले जाने की जिम्मेदारी युवाओं की है। युवाओं के सर्वांगीण उत्थान हेतु प्रधानमंत्री मोदी के योजनाओं द्वारा साकार किया जा रहा है। युवा संसद मंच अपने विचारों काे व्यक्त करने का सशक्त माध्यम है। विश्वविद्यालय परिवार को इस कार्यक्रम के आयोजन के लिए साधुवाद है। आज भारतीय युवा विकसित भारत के निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दे रहा है। भारत को विश्व गुरु बनाने हेतु आधुनिक विषयों एआई, सहित युवाओं को भारतीय ज्ञान परंपरा से सम्बन्धित विषयों योग, आयुर्वेद चिकित्सा, वैदिक गणित, ज्योतिष,वैदिक ज्ञान आदि पर शोध, नवाचार, आवश्यक है क्यों कि यह अमूल्य ज्ञान-निधि भारत का है।

मुख्य अतिथि समरदीप सक्सेना, क्षेत्रीय निदेशक, राष्ट्रीय सेवा योजना (उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखण्ड), भारत सरकार ने अपने उद्बोधन में कहा कि युवा संसद जैसे मंच युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से जोड़ते हैं। युवाओं का देश के उत्थान में विशेष भूमिका रहती है। युवाओं को राष्ट्रीय विचारों का व्यक्त करने उत्कृष्ट मंच है। विकसित भारत युवा संसद के माध्यम से पूरा देश उनको सुनता है। आपातकाल की स्मृति हमें यह सिखाती है कि जागरूक नागरिक ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति होते हैं।

अध्यक्षीय भाषण देते हुए डॉ. सुरेन्द्र सिंह, कुलपति, महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय, गोरखपुर ने कहा कि लोकतंत्र केवल एक व्यवस्था नहीं, बल्कि जीवन पद्धति है। आपातकाल से मिली सीख यह है कि स्वतंत्रता, अनुशासन और संवैधानिक मूल्यों के संतुलन से ही विकसित भारत का निर्माण संभव है।

हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय

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