संतानों की दीर्घायु के लिए माताओं ने रखा हल छठ का व्रत
भगवान बलराम के जन्मोत्सव से जुड़ा है हल छठ पर्व
फतेहपुर, 02 सितंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में बुधवार को हल छठ, ललही छठ, हरछठ अथवा हल षष्ठी के पर्व के दिन माताओं ने व्रत रख कर अपने पुत्रों के लिए दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना की।
यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई भगवान बलराम के जन्मोत्सव से जुड़ा माना जाता है। मान्यता है कि भगवान बलराम हल और गोवंश से विशेष प्रेम करते थे, इसी कारण हल छठ के दिन हल और गोवंश को विश्राम देने की परंपरा चली आ रही है। इस दिन व्रत रखने वाली महिलाएं भगवान बलराम और माता हरछठ की पूजा-अर्चना कर संतान की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करती हैं।
व्रती साधना सिंह ने हलछठ के माहात्म्य के बारे में बताया कि हल छठ के दिन हल से उगाई गई फसल, खेत की उपज तथा गाय के दूध का सेवन नहीं किया जाता। इस दिन गाय और बैलों को भी काम में नहीं लगाया जाता है। व्रत वाली महिलाएं भैंस या बकरी के दूध का प्रयोग करती हैं।
उन्होंने एक पौराणिक कथा सुनाते हुए बताया कि एक गांव में एक गर्भवती ग्वालिन रहती थी। हल षष्ठी के दिन उसका प्रसव होने वाला था, लेकिन दूध-दही खराब होने की चिंता में वह प्रसव पीड़ा के बावजूद उन्हें बेचने निकल पड़ी। रास्ते में झरबेरी की ओट में उसने एक बच्चे को जन्म दिया और नवजात को वहीं छोड़कर दूध बेचने चली गई। उस दिन हल षष्ठी का व्रत था, जिसमें गाय के दूध का उपयोग वर्जित माना जाता है। इसके बावजूद ग्वालिन ने गाय और भैंस का दूध मिलाकर ग्रामीणों को केवल भैंस का दूध बताकर बेच दिया। उसी दौरान पास के खेत में एक किसान हल चला रहा था। अचानक बैल बिदक गये और हल झरबेरी के पास लेटे नवजात बच्चे के पेट में जा लगा। इससे बच्चा अचेत हो गया। वापस लौटने पर ग्वालिन ने बच्चे की हालत देखी तो उसे अपनी गलती का एहसास हुआ। वह गांव में घूम-घूमकर अपनी गलती स्वीकार करने लगी और व्रत रखने वाली महिलाओं से क्षमा मांगने लगी। ग्वालिन के सच्चे पश्चाताप को देखकर महिलाओं ने उसे क्षमा करते हुए आशीर्वाद दिया। मान्यता है कि माता हरछठ की कृपा से उसका बच्चा जीवित और स्वस्थ हो गया। इसी कथा के आधार पर हल छठ के दिन झूठ, छल-कपट और गलत तरीके से किए गए कार्यों का त्याग करने की सीख दी जाती है। महिलाएं श्रद्धा और विश्वास के साथ माता हरछठ की पूजा कर अपनी संतानों की लंबी आयु और सुखमय जीवन की कामना करती हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / देवेन्द्र कुमार

