मीरजापुर के किसान पहाड़ी और पथरीली भूमि पर कर रहे डीएसआर तकनीक से सुगंधित धान की खेती

WhatsApp Channel Join Now
मीरजापुर के किसान पहाड़ी और पथरीली भूमि पर कर रहे डीएसआर तकनीक से सुगंधित धान की खेती


मीरजापुर, 12 जून (हि.स.)। सिंचाई संकट, बढ़ती खेती लागत और फसलों के विपणन की चुनौतियों के बीच मीरजापुर जिले के राजगढ़ क्षेत्र के किसान अब खेती का नया रास्ता चुन रहे हैं। पहाड़ी और पथरीली भूमि वाले देवपुरा, धौरहां समेत कई गांवों में किसानों ने इस वर्ष धान की सीधी बुवाई (डीएसआर) तकनीक अपनाते हुए सुगंधित धान की खेती शुरू कर दी है। किसानों का मानना है कि यह तकनीक कम पानी, कम लागत और बेहतर मुनाफे का विकल्प बनकर उभर रही है।

राजगढ़, पटेहरा और आसपास के कई गांवों में नहरों का पानी नहीं पहुंचता और खेती काफी हद तक वर्षा पर निर्भर है। ऐसे में किसान 120 से 130 दिनों में तैयार होने वाली सुगंधित धान की प्रजातियों जैसे ठाकुरभोग, काला नमक तथा अन्य उन्नत किस्मों की सीधी बुवाई कर रहे हैं। इससे रोपाई में लगने वाले अतिरिक्त श्रम और सिंचाई की आवश्यकता में काफी कमी आती है।

किसानों का कहना है कि धान की पारंपरिक रोपाई के लिए खेतों में पर्याप्त पानी की जरूरत होती है, जबकि डीएसआर तकनीक में कम पानी में भी अच्छी पैदावार संभव है। यदि खरपतवार का समय पर नियंत्रण कर लिया जाए तो सीधी बुवाई से रोपाई की तुलना में बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।

देवपुरा, धौरहां, खटखारिया, भावां, डढ़िंया, बिशनपुर, अटारी, मटिहानी, सरसों, राजापुर, लालपुर, काशोपुर, इमलिया, बघौड़ा, पतरखुरा और रैकरी जैसे गांवों के किसान इस तकनीक को तेजी से अपना रहे हैं। किसान रविंद्र बहादुर सिंह, भोलानाथ सिंह, अंकित सिंह, अजीत चौहान, शिवशंकर सिंह, रमाशंकर सिंह और दिनेश्वर मौर्य ने बताया कि पानी की कमी के कारण हर वर्ष फसल प्रभावित होती थी। वैज्ञानिकों की सलाह पर इस बार उन्होंने सुगंधित धान की सीधी बुवाई का निर्णय लिया है।

काशी हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी के मिर्जापुर स्थित साउथ कैंपस बरकछा के कृषि वैज्ञानिक डॉ. जेपी राय ने बताया कि मीरजापुर का राजगढ़ और पटेहरा क्षेत्र भौगोलिक रूप से ऊबड़-खाबड़ तथा सिंचाई की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण है। ऐसे क्षेत्रों में डीएसआर तकनीक किसानों के लिए लाभकारी साबित हो सकती है। इससे कम लागत और कम सिंचाई में अच्छी पैदावार मिलने के साथ विपणन की समस्या भी कम होती है। वहीं सहायक विकास अधिकारी कृषि संतोष कुशवाहा ने बताया कि किसानों को डीएसआर विधि से धान उत्पादन का प्रशिक्षण दिया गया है। जागरूकता कार्यक्रमों और किसान गोष्ठियों के माध्यम से किसानों को इस तकनीक के लाभ बताए गए हैं, जिसके चलते बड़ी संख्या में किसान इसे अपना रहे हैं।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / गिरजा शंकर मिश्रा

Share this story