कुटम्ब प्रबोधन गोष्ठी में संयुक्त परिवारों के बिखरने की चिंता
लखनऊ, 02 मई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शनिवार को राष्ट्रधर्म मासिक पत्रिका के कार्यालय में आयोजित गोष्ठी में कमजोर होते संयुक्त परिवारों को लेकर चिन्ता प्रकट की गयी। गोष्ठी में उपस्थित सभी वक्ताओं का मानना था कि धीरे-धीरे संस्कारों में कमी आ रही है। इसको लेकर सतर्क और सक्रिय रहने की आवश्यकता है। गोष्ठी का विषय कुटम्ब प्रबोधन रहा। उल्लेखनीय है कि यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के पंच परिवर्तनों में से एक है। गोष्ठी का संचालन राष्ट्रधर्म के निदेशक डॉ. ओमप्रकाश ने किया।
कार्यक्रम में लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर सौरभ मालवीय ने कहा कि परिवार में रहकर अच्छे संस्कार, परस्पर प्रेम, नैतिकता, राष्ट्रप्रेम जैसी बातें सीखी जा सकती हैं। जब यह भाव किसी व्यक्ति में उत्पन्न होते हैं तब वह पूरे समाज को साथ लेकर चलता है।
जयप्रकाश पाण्डेय ने संयुक्त परिवारों के बिखरने पर चिन्ता व्यक्त की। उन्होंने आशा व्यक्त की कि भविष्य में सब अच्छा होगा। गौसिया खानम ने भी कहा कि परिवारों में संस्कार कम हो रहे हैं। हमें सजग होना होगा।
अमित कुमार मल्ल ने कहा कि परिवार पर सर्वाधिक आक्रमण हो रहे हैं। यह चिन्ताजनक है। उन्होंने कहा कि अविवाहित युगलों की संख्या बढ़ रही है। जो विवाहित हैं, वे बच्चे नहीं चाहते हैं। तलाक के मुकदमें तेजी से बढ़ रहे हैं। वृद्धों की स्थायी जगह वृद्धाश्रम होती जा रही है। इस पर पूरे समाज को चिन्ता करने की आवश्यकता है।
गोष्ठी के अध्यक्ष बाबूलाल शर्मा ने कहा कि सबका सम्मान करना परिवार की मूल भावना है। असहमति के साथ भी वैमनस्यता नहीं और विविधता में एकता के भाव को पुष्ट करने की आवश्यकता है। इस दौरान अशोक बाजपेयी, के.के. वत्स, कुमार अशोक पांडेय, संतोष तिवारी, मृत्युंजय दीक्षित, राजेन्द्र शंकर द्विवेदी और आलोक त्रिपाठी ने भी अपने विचार व्यक्त किये।
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हिन्दुस्थान समाचार / मोहित वर्मा

