प्रबंधन की संवादहीनता एवं उत्पीड़न से बिगड़ रहा ऊर्जा निगमों का औद्योगिक वातावरण

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प्रबंधन की संवादहीनता एवं उत्पीड़न से बिगड़ रहा ऊर्जा निगमों का औद्योगिक वातावरण


उप्र विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने कहा - बिजली व्यवस्था सामान्य बनाए रखने के लिए उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां समाप्त कर संवाद शुरू किया जाए

लखनऊ, 16 जून (हि.स.)। उत्तर प्रदेश विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने पॉवर कॉरपोरेशन के शीर्ष प्रबंधन पर संवादहीनता तथा उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां जारी रखने का आरोप लगाया। समिति ने कहा कि प्रबंधन के इस रवैये से ऊर्जा निगमों का औद्योगिक वातावरण लगातार बिगड़ रहा है। इसका प्रतिकूल प्रभाव सीधे तौर पर बिजली व्यवस्था पर पड़ना स्वाभाविक है।

संघर्ष समिति ने राजधानी लखनऊ में समिति कार्यलय में मंगलवार को बैठक की। इस दौरान संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि समय की मांग है कि पॉवर कॉरपोरेशन प्रबंधन अपनी हठधर्मिता त्यागकर संघर्ष समिति के साथ सार्थक संवाद शुरू करे तथा बिजली कर्मियों के विरुद्ध की गई सभी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां तत्काल वापस ले। आज सबसे बड़ी आवश्यकता यह है कि उपभोक्ताओं को निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। इसके लिए स्वस्थ कार्य वातावरण तथा पर्याप्त मानव संसाधन दोनों अनिवार्य हैं।

संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि बिजली कर्मियों के विरुद्ध की गई अधिकांश उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां निजीकरण के उद्देश्य से प्रेरित हैं। बड़े पैमाने पर 45 प्रतिशत से अधिक संविदा कर्मियों को हटाए जाने की कार्रवाई भी इसी नीति का हिस्सा है। वर्तमान में बिजली व्यवस्था पर सबसे अधिक प्रतिकूल प्रभाव संविदा कर्मियों की भारी संख्या में की गई छंटनी के कारण पड़ा है। इसके अतिरिक्त, सामान्य धरना-प्रदर्शन और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वाले बिजली कर्मियों के विरुद्ध भी दंडात्मक कार्रवाई की जा रही है।

संघर्ष समिति ने कहा कि मार्च 2023 के आंदोलन के दौरान बिजली कर्मियों पर की गई उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां आज तक वापस नहीं ली गई हैं। जबकि आंदोलन के दौरान ही ऊर्जा मंत्री एवं संघर्ष समिति के मध्य समझौता हो गया था और ऊर्जा मंत्री ने संघर्ष समिति के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता में स्पष्ट निर्देश दिए थे कि बिजली कर्मियों पर की गई सभी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस ली जाएं। दुर्भाग्यपूर्ण है कि तीन वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी न केवल वे कार्यवाहियां जारी हैं, बल्कि संबंधित कर्मचारियों को कठोर दंड भी दिए जा रहे हैं, जिससे कार्य का वातावरण निरंतर खराब हो रहा है।

संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया कि जिन मामलों को लेकर कार्रवाई की जा रही है, उनमें आंदोलन के दौरान भी बिजली कर्मियों ने उपभोक्ता सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी और अपनी जिम्मेदारियों का पूर्ण निर्वहन किया।

संघर्ष समिति ने चेतावनी दी कि यदि ऊर्जा मंत्री के निर्देशों एवं समझौते की भावना की उपेक्षा करते हुए बिजली कर्मियों को दंडित करने की कार्रवाई जारी रखी जाती है, तो इसकी स्वाभाविक एवं तीखी प्रतिक्रिया होगी। इसलिए प्रबंधन को तत्काल संघर्ष समिति के साथ वार्ता कर सभी लंबित उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस लेनी चाहिए तथा स्वस्थ औद्योगिक वातावरण बहाल करने की दिशा में सकारात्मक पहल करनी चाहिए।

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हिन्दुस्थान समाचार / मोहित वर्मा

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