भीषण गर्मी में बिजली व्यवस्था सुधारने के लिए उत्पीड़न की कार्रवाइयां तत्काल वापस ली जाएं : विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति
लखनऊ, 03 मई (हि.स.)। भीषण गर्मी के चलते प्रदेश में बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे समय में उपभोक्ताओं की समस्याओं का प्रभावी समाधान निकालने और बिजली व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने का एकमात्र रास्ता यह है कि पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन टकराव की नीति छोड़कर सकारात्मक पहल करे। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने रविवार को कहा कि पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष तत्काल संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों को वार्ता के लिए बुलाएँ और उन्हें विश्वास में लेकर गर्मियों के दौरान निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करें।
संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया कि मार्च 2023 से शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे बिजली कर्मियों पर की गई सभी अनुशासनात्मक एवं उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयाँ तत्काल वापस ली जानी चाहिए। यह कार्रवाइयाँ किसी कदाचार के कारण नहीं, बल्कि शांतिपूर्ण आंदोलन के चलते की गई हैं। ऐसी स्थिति में सामान्य कार्य वातावरण बहाल करने के लिए इनका समाप्त होना अत्यंत आवश्यक है।
संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने याद दिलाया कि मार्च 2023 की सांकेतिक हड़ताल के बाद प्रदेश के ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि आंदोलन में शामिल कर्मचारियों पर की गई सभी कार्रवाइयाँ वापस ली जाएँ तथा हटाए गए संविदा कर्मियों को बहाल किया जाए। दुर्भाग्यपूर्ण है कि तीन वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद इन निर्देशों का पालन नहीं किया गया। इसके विपरीत, अत्यंत कम वेतन पाने वाले संविदा कर्मियों को सेवा से बाहर रखा गया और शांतिपूर्ण ढंग से कार्यालय समय के बाद सभा कर रहे कर्मचारियों पर नई अनुशासनात्मक कार्रवाइयाँ थोप दी गईं, जिससे कार्य का वातावरण और अधिक खराब हुआ है।
संघर्ष समिति ने बताया कि इन मुद्दों पर सरकार और प्रबंधन का ध्यान आकर्षित करने के लिए 16 अप्रैल से व्यापक जन-जागरण अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के अंतर्गत बिजली कर्मियों को संगठित किया जा रहा है तथा उपभोक्ताओं को विश्वास में लेकर उनकी समस्याओं को सर्वोच्च प्राथमिकता पर हल करने का संकल्प लिया जा रहा है।
संघर्ष समिति ने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन समस्याओं के समाधान की दिशा में पहल करने के बजाय धमकी और भय का वातावरण बनाने का प्रयास कर रहा है। इस प्रकार की नीति से बिजली व्यवस्था में सुधार संभव नहीं है।
आज अवकाश के दिन प्रदेश के सभी जनपदों और परियोजनाओं में जन-जागरण अभियान के अंतर्गत बिजली कर्मियों ने आपसी संपर्क कर यह संकल्प दोहराया कि प्रदेश में बिजली का निजीकरण किसी भी स्थिति में नहीं होने दिया जाएगा तथा कर्मचारियों पर की गई सभी उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों को वापस कराया जाएगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / मोहित वर्मा

