बिगड़ती बिजली व्यवस्था पर चेयरमैन तत्काल वार्ता करें या जिम्मेदारी लें : विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति

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बिगड़ती बिजली व्यवस्था पर चेयरमैन तत्काल वार्ता करें या जिम्मेदारी लें : विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति


पनकी व जवाहरपुर ताप बिजली घरों के निजीकरण पर 13 मई को काली पट्टी बांधकर विरोध का ऐलान

लखनऊ, 04 मई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश में लगातार बिगड़ती बिजली व्यवस्था पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए उत्तर प्रदेश विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने सोमवार को पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन को चेतावनी दी। समिति के संयाेजक शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि वह तत्काल संघर्ष समिति से सार्थक वार्ता करे, अन्यथा व्यवस्था की पूरी जिम्मेदारी स्वयं स्वीकार करें।

संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा कि प्रबंधन की नीतिगत गलतियों और जमीनी हकीकत से कटे निर्णयों के कारण प्रदेश की बिजली व्यवस्था चरमराती जा रही है, जिससे उपभोक्ताओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे समय में टकराव नहीं, बल्कि संवाद और समाधान की आवश्यकता है।

संघर्ष समिति ने स्पष्ट कहा कि यदि कॉरपोरेशन के चेयरमैन तत्काल वार्ता नहीं करते हैं, तो वर्तमान अव्यवस्था और उससे उत्पन्न सभी समस्याओं की जिम्मेदारी उन्हें स्वयं लेनी होगी। साथ ही, बिजली कर्मियों के उत्पीड़न की किसी भी कार्रवाई को तुरंत बंद किया जाए और उत्पीड़न की दृष्टि से की गई समस्त कार्यवाहियां वापस ली जाय।

संघर्ष समिति ने पनकी और जवाहरपुर ताप बिजली घरों के परिचालन एवं अनुरक्षण के निजीकरण की प्रक्रिया को जनविरोधी बताते हुए इसे तत्काल निरस्त करने की मांग की है। चेतावनी दी गई है कि यदि टेंडर प्रक्रिया वापस नहीं ली गई, तो आगामी 13 मई को प्रदेश भर के सभी बिजली कर्मचारी, अभियंता, जूनियर इंजीनियर काली पट्टी बांधकर पूरे दिन कार्य करेंगे और कार्यालय समय के बाद व्यापक विरोध प्रदर्शन करेंगे।

संघर्ष समिति ने कहा कि उत्पादन निगम की परियोजनाओं ने लगातार मुनाफा कमाकर अपनी दक्षता सिद्ध की है और देश में उत्कृष्ट बिजली उत्पादन का रिकॉर्ड बनाया है। ऐसे में लाभकारी परियोजनाओं को निजी कंपनियों को सौंपना जनता के संसाधनों की खुली लूट है, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

संघर्ष समिति ने बताया कि पनकी ताप बिजली घर पर लगभग 8000 करोड़ रुपये और जवाहरपुर ताप बिजली घर पर लगभग 14000 करोड़ रुपये की भारी-भरकम सार्वजनिक धनराशि खर्च की गई है। अब इन परियोजनाओं को 25 वर्षों के लिए निजी हाथों में सौंपना प्रदेश की जनता के साथ सीधा विश्वासघात है।

संघर्ष समिति ने यह भी आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटरों का नियंत्रण निजी कंपनियों को देने के कारण उपभोक्ताओं की समस्याएं बढ़ी हैं और व्यवस्था में असंतुलन पैदा हुआ है। संघर्ष समिति ने मांग की कि प्रबंधन तत्काल संवाद शुरू करे, दमनात्मक कार्रवाइयों को बंद करे और पहले से की गई उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों को वापस ले।

संघर्ष समिति ने दोहराया कि बिजली कर्मी सदैव उपभोक्ताओं के हित में कार्य करते रहे हैं और आगे भी उन्हें किसी प्रकार की असुविधा नहीं होने देंगे।

निजीकरण के विरोध में चल रहे व्यापक जन-जागरण अभियान के तहत आज उरई, झांसी और पारीछा ताप बिजली परियोजना में विरोध सभाएं आयोजित की गईं, जिन्हें केंद्रीय पदाधिकारी जितेंद्र सिंह गुर्जर और महेंद्र राय ने संबोधित किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / मोहित वर्मा

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