निर्णय सिंधु और गरुण पुराण के अनुसार पुत्रदा एकादशी का व्रत सोमवार को श्रेष्ठ

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निर्णय सिंधु और गरुण पुराण के अनुसार पुत्रदा एकादशी का व्रत सोमवार को श्रेष्ठ


लखनऊ, 21 अगस्त (हि.स.)। एकादशी का व्रत रखने वालों के लिए इस बार असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गयी है। तिथि के आरंभ से लेकर पूर्ण होने तक के समय को देखते हुए रविवार यानि 23 अगस्त को एकादशी बताई जा रही है। हालांकि शास्त्रों में एकादशी का व्रत करने की जो सलाह दी गयी है, उसके मुताबिक इस बार सोमवार को पुत्रदा एकादशी का व्रत करना श्रेष्ठ माना गया है।

वाराणसी के महावीर पंचांग के अनुसार, 22 अगस्त शनिवार की रात 1:45 बजे एकादशी लग रही है, जो रविवार की रात 3:46 बजे तक रहेगी। यानि सोमवार के भोर तक एकादशी है। ज्योतिष के जानकार आचार्य प्रदीप तिवारी ने बताया कि इस बार की एकादशी 52 दण्ड से अधिक है। निर्णय सिंधु के अनुसार 52 दण्ड से अधिक होने की वजह से एकादशी का व्रत ग्रहस्थ नहीं रख सकते। आचार्य के अनुसार, इस प्रकार की एकादशी का व्रत ग्रहस्थों को नहीं रखना चाहिए। उनके लिए सोमवार को व्रत रखना श्रेयस्कर सिद्ध होगा।

उन्होंने गरुण पुराण का उल्लेख करते हुए बताया कि इस पुराण में स्पष्ट कहा गया है कि दशमी से वृद्ध एकादशी का व्रत भी त्याज्य है। इस बार पड़ने वाली एकादशी 55 दण्ड की है। दशमी 50 दण्ड की है। एकादशी अधिक समय तक रहने की वजह से उसे दशमी से वृद्ध माना गया है। इस मत के अनुसार भी एकादशी का व्रत नहीं रखा जा सकता है। गरुण पुराण में उल्लेख किया गया है कि इस प्रकार की एकादशी का व्रत गांधारी ने रखा था। परिणाम स्वरूप उन्होंने अपने 100 पुत्रों को खो दिया था। इसलिए ग्रहस्थों को ऐसी एकादशी का व्रत करने से वर्जित किया गया है।

इस तिथि के महात्म्य की चर्चा करते हुए आचार्य ने कहा कि जिस प्रकार इस एकादशी का नाम पुत्रदा एकादशी है, उसी प्रकार इसका फल भी है। जो लोग पुत्र की इच्छा रखते हैं, वे इस व्रत को रख सकते हैं। यह एकादशी साल में एक बार ही आती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुत्र का मतलब यहां शंतान से है। बेटा या बेटी से नहीं है। शंतान की इच्छा रखने वाले व्रत करेंगे। इस व्रत का पारण मंगलवार की सुबह 5:42 बजे के बाद का समय उचित रहेगा।-------------

हिन्दुस्थान समाचार / दिलीप शुक्ला

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