डिजिटल डेमोक्रेसी डायलॉग 'त्रिवेणी' का समापन समारोह

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डिजिटल डेमोक्रेसी डायलॉग 'त्रिवेणी' का समापन समारोह


डिजिटल डेमोक्रेसी डायलॉग 'त्रिवेणी' का समापन समारोह


-नागालैंड-म्यांमार सीमा के आखिरी गांव में भी लोग मोदी जी और योगी जी को जानते व पहचानते हैं: मंत्री तेमजेन इम्ना अलॉन्ग

-राम मंदिर निर्माण के बाद देशभर के मंदिरों में श्रद्धालुओं की संख्या 5 गुना बढ़ी: गौरांग दास

-आज ज्ञानवापी, मथुरा कृष्ण जन्मभूमि के मामलों में सही जानकारी सोशल मीडिया से तुरंत लोगों तक पहुंच रही हैः वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन

लखनऊ, 15 जून (हि.स.)। लखनऊ स्थित एक होटल में तीन दिवसीय डिजिटल डेमोक्रेसी डायलॉग 'त्रिवेणी' में सोमवार को समापन समारोह में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के सुशासन, संस्कृति और समृद्धि पर चर्चा हुई। चर्चा का मुख्य केंद्र दो सत्र में समृद्धि (महिला एवं युवा) और सांस्कृतिक पुर्नजागरण रहा। चर्चा के दौरान अतिथियों ने कहा कि उत्तर प्रदेश की भविष्य की समृद्धि काफी हद तक उसकी महिलाओं और युवाओं की पूरी क्षमता का इस्तेमाल करने की काबिलियत पर निर्भर करेगी।

पहले सत्र में प्रदेश के समाज कल्याण, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने कहा कि डेमोक्रेसी में हम अपने लीडर और जनसेवकों को चुन सकते हैं। इसके साथ कानून और समानता समाज में जरूरी है। आने वाला समय में डिजिटल क्रांति होगी, जिसके लिए हमें हर चीज सीखनी होगी। उन्होंने कहा कि कंटेंट क्रिएटर्स ने नई राह खोली है। सीएम योगी बार-बार याद दिलाते है कि किसी भी नई पॉलिसी पर जनता से फीडबैक लो, इसलिए हम सोशल मीडिया की भी मदद लेते हैं।

चर्चा के दौरान वरिष्ठ पत्रकार मृणालिनी नानिवडेकर ने कहा कि किसी भी देश या प्रदेश के विकास में महिलाओं और युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि आज न्यूज रूम में भी बहुत सी महिलाएं आ गईं हैं, 25 साल पहले ऐसा नहीं था। उत्तर प्रदेश में महिला वर्क फोर्स, बर्थ रेट बढ़ रहा है। बड़े बदलाव के लिए महिलाओं के काम को प्रोत्साहित करना होगा।

आज यूपी समेत देश में परिवर्तन यह आया है कि शासन-प्रशासन महिलाओं से जुड़े मामलों में संवेदनशील हो गया है। वो अब पहले से बेहतर तरीक से अपनी बात रख पा रही हैं। महिला क्रिएटर भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि हम काफी समय से महिला आरक्षण की बात सुनते आ रहे हैं, जल्द ही ये लागू भी हो सकता है। उन्होंने क्रिएटर्स के सवाल पर फेमिनिजम का अर्थ बताया, शिवा और शक्ति का एक साथ रहना।

नागालैंड के आखिरी गांव में भी मोदी-योगी की बड़ी पहचान

नागालैंड सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री तेमजेन इम्ना अलॉन्ग ने कहा कि आज डिजिटल क्रांति नई ऊर्जा ला रहा है। देश के सभी डिजिटल क्रांतिकारियों को दात्यिव लेना होगा। डिजिटल क्रिएटर के सहयोग से सक्षम भारत, एक भारत का नरेटिव बनाना होगा। उन्होंने कहा कि डिजिटल मीडिया ने राज्यों की सीमा को तोड़ा है। चर्चा के दौरान सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर को सकारात्मक कंटेंट बनाने की सलाह दी, क्योंकि देशभर की नजर उत्तर प्रदेश पर है। उन्होंने कहा कि आप देश को इसके जरिए जोड़ सकते हैं।

उन्होंने कहा कि नागालैंड-म्यांमार सीमा के आखिरी गांव में भी आज लोग मोदी जी और योगी जी को जानते व पहचानते हैं। यह सब डिजिटल क्रिएटर व डिजिटल क्रांति की वजह से संभव हुआ है। उन्होंने कहा कि नागालैंड के लोगों को भी विश्वास है कि पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ जैसे नेता देश को आगे ले जाएंगे। हमारी नागा जनजाति भी उनका साथ देने को तैयार है। उन्होंने बताया कि 2014 में केंद्र में मोदी सरकार आने के बाद नागालैंड में सबसे ज्यादा सड़कों का निर्माण हुआ। नागालैंड में 18 नेशनल हाईवे के लिए 16 हजार करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं।

वहीं, पटना यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर गुरु प्रकाश पासवान ने कहा कि प्रदेश व देश में महिलाओं को अवसर मिल रहे हैं। 75 वर्षों में पहली बार एक आदिवासी परिवार से जुड़ी महिला को देश का सर्वोच्च पद मिला। साथ ही कहा कि डिजिटल क्रिएटर में पावर है कि वे अपनी सूचना एक बार में लाखों-करोड़ों लोगों तक पहुंचा सकते हैं। आज के दौर में एंटरप्रेन्योरशिप और इनोवेशन विकास के लिए काफी अहम है।

राम मंदिर बनने से 5 गुना बढ़े श्रद्धालु

दूसरे सत्र में सांस्कृतिक पुनर्जागरण पर अहम चर्चा हुई। इस दौरान इस्कॉन गवर्निंग बॉडी कमिश्नर गौरांग दास ने कहा कि भगवत गीता एक ऐसा ग्रंथ है जोकि आपके दर्द को समझने का मूल है। भारत के 100 करोड़ हिंदू थोड़ा समय निकालकर शास्त्र को समझने का प्रयास करें। सांस्कृतिक पुनर्जागरण का पहला पड़ाव गीता को अपने जीवन में उतारना है।

उन्होंने कहा कि मंदिर एक प्रेरणा केंद्र होता है। अयोध्या में श्रीराम जी का मंदिर बना, जिसके बाद देशभर के मंदिरों में जाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में 5 गुना तक बढ़ गई है। उन्होंने सत्र में मौजूद सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर से कहा कि वह अपने कंटेंट के माध्यम से श्रीराम के संदेश को घर-घर तक पहुंचाए। लोगों को समझाए कि वह किस प्रकार अपने परिवार को एक परिवार के रूप में ही स्थापित करते हुए घर को मंदिर बना सकते हैं।

2014 से पहले राम मंदिर निर्माण असंभव था

इस दौरान लेखिका, सामाजिक कार्यकर्ता शेफाली वैद्य ने कहा कि हमने 2014 से पहले का दौर देखा है। उस समय राम मंदिर निर्माण के बारे में सोचना असंभव लगता था। डिजिटल पेमेंट समेत अन्य ग्रोथ के बारे में ऐसी कल्पना नहीं की थी। हालांकि बीते कुछ वर्षों में काफी बदलाव आया है।

उन्होंने कहा कि कंटेंट क्रिएटर सांस्कृतिक पुनर्जागरण के लिए अपने घरों के पास के मंदिरों पर कंटेंट बनाएं। इसके बारे में लोगों को जानकारी दें, लोग उसके इतिहास को भी जान पाएंगे। अपनी संस्कृति को इस तरह भी बढ़ाया जा सकता है।

सत्र में वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने कहा कि राम मंदिर आंदोलन को हमने बचपन से देखा था, उस दौर में मेरे पिता को भी काफी मुश्किलों को सामना करना पड़ा। यह कानूनी लड़ाई करीब 69 वर्ष चली और वह अत्याचार का दौर था। उस दौर में सच्चाई दब जाती थी, हालांकि आज सोशल मीडिया के दौर में यह संभव नहीं है। आज ज्ञानवापी, मथुरा कृष्ण जन्मभूमि के मामलों में सही जानकारी तुरंत लोगों तक पहुंच रही है। कंटेंट क्रिएटर भी हमारे पक्ष को सही तरीके से लोगों तक पहुंचा रहे है, यह एक बड़ा बदलाव है। इससे लोगों में आस्था का भी विस्तार हो रहा है।

उन्होंने क्रिएटर्स से कहा कि हमें कोई हेट स्पीच नहीं देनी है, बस लोगों तक सही बात पहुंचानी है। उन्होंने कहा कि कोर्ट समाज का सबसे बड़ा दर्पण है। अब कोर्ट में कार्यवाही भी लाइव हो रही है, जिसके तथ्यों को लेकर जनता तक सही तरीके से पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने क्रिएटर्स को भी इस दिशा में जिम्मेदारी पूर्वक काम करने के लिए कहा।

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हिन्दुस्थान समाचार / दीपक

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