योग बंधन–2026 के दूसरे दिन डीडीयू ने योग से जोड़े दक्षिण प्रशांत देशों के प्रतिनिधि

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योग बंधन–2026 के दूसरे दिन डीडीयू ने योग से जोड़े दक्षिण प्रशांत देशों के प्रतिनिधि


गोरखपुर, 09 जून (हि.स.)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम “योग बंधन–2026” के दूसरे दिन मंगलवार काे योग के माध्यम से वैश्विक सद्भाव, समग्र स्वास्थ्य एवं अंतरराष्ट्रीय सहयोग का प्रभावशाली संदेश दिया गया। कार्यक्रम में दक्षिण प्रशांत क्षेत्र के अनेक देशों के प्रतिनिधियों, शिक्षाविदों, शोधार्थियों एवं योग विशेषज्ञों ने सहभागिता कर योग की सार्वभौमिक उपयोगिता पर विचार साझा किए।

कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि योग केवल भारत की सांस्कृतिक धरोहर नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता को स्वस्थ, संतुलित और सकारात्मक जीवन जीने की दिशा प्रदान करने वाला वैज्ञानिक जीवन-दर्शन है। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा संस्थान (एलएनआईपीई), ग्वालियर के सहायक आचार्य डॉ. अमित यादव रहे। उन्होंने “रोगों की रोकथाम एवं प्रबंधन हेतु योग : एक सार्वभौमिक चिकित्सीय दृष्टिकोण” विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि आधुनिक जीवनशैली से उत्पन्न अनेक शारीरिक एवं मानसिक समस्याओं का समाधान योग में निहित है। उन्होंने विभिन्न योगासनों एवं प्राणायामों की वैज्ञानिक उपयोगिता तथा उनके चिकित्सीय लाभों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों में डॉ. आर. के. प्रजापति, डॉ. तनवीर हैदर नकवी, डॉ. कपिल दवे, रांगी जोसेफ डेविस, एंडे लोवे, सतीब निशा खान, शेरोन घाबूस एवं जलेसी राबाकेवा प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समन्वयन विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय प्रकोष्ठ के निदेशक प्रो. रामवंत गुप्ता ने किया। अंत में डॉ. आर. के. प्रजापति ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय

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