मोटे अनाज पोषण में गेहूं-चावल से बेहतर : डॉ. आरके यादव

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मोटे अनाज पोषण में गेहूं-चावल से बेहतर : डॉ. आरके यादव


कानपुर, 05 जनवरी (हि.स.)। मोटे अनाज (श्री अन्न) गेहूं और चावल की तुलना में सस्ते होने के साथ-साथ उच्च प्रोटीन, फाइबर, विटामिन तथा आयरन आदि की उपस्थिति के चलते पोषण के लिए बेहतर आहार होते हैं। मोटे अनाजों में कैल्शियम और मैग्नीशियम की प्रचुरता होती है। यह जानकारी सोमवार को सीएसए निदेशक शोध डॉ. आरके यादव ने दी।

चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) कानपुर के प्रसार निदेशालय के लाल बहादुर शास्त्री सभागार कक्ष में आज श्रीअन्न (मिलेट्स) वैज्ञानिक खेती से मूल्य वर्धन तक विषय पर एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन निदेशक शोध डॉ आरके यादव के मार्गदर्शन में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय झांसी के निदेशक शोध डॉ एसके चतुर्वेदी द्वारा ग्रामीण स्तर पर कुपोषण को कम करने तथा पोषक तत्वों की पूर्ति करने के लिए मिलेट्स तथा स्थानीय उत्पादों के पौष्टिक गुणों के साथ-साथ उनकी प्रसंस्करण तकनीकियों को विस्तार से समझाया गया।

विशिष्ट अतिथि उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद के उप महानिदेशक डॉ परमेंद्र सिंह ने बताया कि यूनाइटेड नेशन जनरल असेंबली ने 2023 को इंटरनेशनल ईयर ऑफ मिलेट्स के रूप में मनाने के लिए भारत के प्रस्ताव को स्वीकृति दी थी।

डॉ सिंह ने बताया कि मोटे अनाज के सेवन से कई प्रकार की स्वास्थ्य समास्याओं से निपटा जा सकता है जैसे मधुमेह और मोटापे की समस्या, क्योंकि यह ग्लूटेन युक्त होते हैं और इनमें ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है। मोटे अनाज एंटी ऑक्सीडेंट का संपन्न स्त्रोत है। इसमें आयरन की उच्च मात्रा महिलाओं की प्रजनन आयु और शिशुओं में एनीमिया के उच्च प्रसार को रोकने में सक्षम है। विशिष्ट अतिथि ब्लॉक प्रमुख सरसौल एवं चंद्रशेखर महिला कृषक समिति की अध्यक्ष डॉक्टर विजय रत्ना तोमर ने बताया कि आर्थिक समस्या की दृष्टि से मोटे अनाज बहुत ही उपयुक्त होते हैं। चूंकि मोटे अनाज के उत्पादन हेतु निवेश की कम आवश्यकता होती है।

अतः ये किसानों के लिए आय के स्थायी स्त्रोत साबित हो सकते हैं। कृषक प्रशिक्षण में विश्वविद्यालय के कुल सचिव डॉक्टर नौशाद खान, निदेशक बीज एवं प्रक्षेत्र डॉ विजय कुमार यादव, कृषक समिति के अध्यक्ष बाबू सिंह सहित अन्य ने भी किसानों को संबोधित किया। स्वागत एवं धन्यवाद संबोधन कार्यक्रम आयोजक सचिव डॉक्टर श्वेता यादव द्वारा किया गया।

कार्यक्रम में आसपास जनपदों के कृषकों की सक्रिय भागीदारी रही। कृषकों को पौष्टिक एवं स्वादिष्ट प्रसंस्करित उत्पादों के निर्माण में साफ सुथरे उपयोगी उपकरण, श्रीअन्न की वैज्ञानिक, खेती मूल्य वर्धन, ठंडे, सूखे एवं हवादार स्थान पर उत्पादों का संग्रहण जैसे आदि विशेष ध्यान रखने योग्य बातों के बारे में बताया गया।

प्रशिक्षण दौरान डॉ महक सिंह, डॉ एमजेड सिद्दीकी, डॉ लोकेंद्र सिंह, डॉ वीके कनौजिया, डॉ विनोद प्रकाश, डॉ भूपेंद्र कुमार सिंह, मीडिया प्रभारी डॉक्टर खलील खान ने उपस्थित होकर सहयोग प्रदान किया। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉक्टर अरविंद कुमार द्वारा किया गया।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

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