(लीड) श्री राम कथा महोत्सव में पीलीभीत पहुंचे मुख्यमंत्री योगी, बोले—पहले रामभक्तों पर गोलियां चलती थीं, आज पुष्पवर्षा से होता है स्वागत
-अयोध्या में प्रज्ज्वलित होने वाला एक-एक दीप पूरे उत्तर प्रदेश की समृद्धि और विकास का कारण बनता है : सीएम योगी
-पिछली सरकारों ने जहां अयोध्या में समस्याएं दीं, वहीं रामभक्तों की सरकार ने श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और सम्मान की व्यवस्था की
पीलीभीत, 03 नवंबर (हि.स.)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अयोध्या में प्रज्ज्वलित होने वाला एक-एक दीप पूरे उत्तर प्रदेश की समृद्धि और विकास का कारण बनता है। दीपोत्सव में जलने वाले दीप केवल भगवान श्रीराम के आगमन की स्मृति को जीवंत नहीं करते, बल्कि प्रदेश की प्रगति, खुशहाली और उज्ज्वल भविष्य का भी प्रतीक हैं। आस्था भारत की सबसे बड़ी ताकत है। इसी आस्था ने विविधताओं से भरे देश को एकता के सूत्र में बांध रखा है। उन्होंने कहा कि पहले रामभक्तों पर लाठियां और गोलियां चलती थीं, आज उन पर पुष्पवर्षा होती है। पहले सवाल था कि रामलला टेंट से कब निकलेंगे, आज भव्य मंदिर में लाखों श्रद्धालु दर्शन कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री मंगलवार को जनपद पीलीभीत के निरानपुर गांव में ब्रह्मलीन महंत योगी शांतिनाथ की पुण्य स्मृति में आयोजित श्रीराम कथा महोत्सव को संबोधित कर रहे थे। इससे पूर्व, मुख्यमंत्री ने परिसर में स्थित शिव मंदिर में पूजा अर्चना की। विभिन्न परियोजनाओं का लोकार्पण किया। साथ ही उन्होंने पवित्र व्यास पीठ पर विराजमान श्री राम कथा के व्यास पूज्य संत अंजनी शरण जी को वस्त्र और फल भेंटकर सम्मानित किया और श्रद्धापूर्वक रामकथा का श्रवण किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दुनिया में करीब 200 देश हैं। सबकी अपनी विशेषताएं, पहचान, चुनौतियां और उपलब्धियां हैं। कहीं हजारों की आबादी है तो कहीं लाखों और करोड़ों में जनसंख्या है। 50 करोड़ से अधिक आबादी वाले देशों में भारत और चीन शामिल हैं। यूरोप एक दिखाई देता है लेकिन वहां भी अलग-अलग राजनीतिक इकाइयों वाले अनेक देश हैं। इसके विपरीत भारत में उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक रूप-रंग, बोली और भाषा की विविधता होने के बावजूद पूरा देश एक भाव और एक भंगिमा के साथ एकता के सूत्र में बंधा है।
पांच सौ वर्षों के संघर्ष के बाद अयोध्या में साकार हुआ राम मंदिर का संकल्प
मुख्यमंत्री ने कहा कि पांच सौ वर्षों तक रामजन्मभूमि की मुक्ति के लिए आस्था बिना रुके, बिना डिगे और बिना पीछे हटे संघर्ष करती रही। अंततः जब पूरा भारत एक स्वर में खड़ा हुआ तो अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ। उन्होंने दो नवंबर 1990 की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दिन अयोध्या में रामभक्तों पर गोलियां चलाई गई थीं और सैकड़ों रामभक्त घायल हुए थे। उस समय अयोध्या में जय श्रीराम बोलने और रामभक्तों के आने तक पर प्रतिबंध था। बुनियादी सुविधाओं का अभाव था। संकरी गलियां, गंदगी, खराब सड़कें और अव्यवस्थाएं थीं। अयोध्या वायु सेवा से नहीं जुड़ी थी और रेलवे की सिंगल लाइन थी।
उन्होंने कहा कि कल अयोध्या में दीपोत्सव की तैयारियों की बैठक के लिए जाने के दौरान उन्होंने वहां का बदला हुआ स्वरूप देखा। प्रतिदिन एक लाख से अधिक श्रद्धालु रामलला के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। पर्व और त्योहारों पर यह संख्या पांच लाख से लेकर 50 लाख तक पहुंच जाती है। आज अयोध्या में चारों दिशाओं से चार लेन की सड़कें, बेहतर रेल सुविधाएं और हवाई सेवा उपलब्ध है। अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का नाम महर्षि वाल्मीकि के नाम पर रखा गया है। पिछली सरकारों ने जहां समस्याएं दीं, वहीं रामभक्तों की सरकार ने श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और सम्मान की व्यवस्था की।
तुष्टीकरण से आतंकवाद बढ़ा, संतुष्टीकरण से मजबूत हुआ एक भारत-श्रेष्ठ भारत
मुख्यमंत्री ने कहा कि तुष्टीकरण का भाव अनास्था और अराजकता को बढ़ावा देता है। देश जब तुष्टीकरण के रास्ते पर चला तो आतंकवाद, उग्रवाद और नक्सलवाद बढ़ा। इसके विपरीत संतुष्टीकरण के भाव के साथ बिना भेदभाव प्रत्येक नागरिक तक योजनाओं का लाभ पहुंचने से देश आगे बढ़ा है। यही भाव आज एक भारत-श्रेष्ठ भारत की आधारशिला बन रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या के साथ काशी, मथुरा-वृंदावन और प्रदेश के अन्य धार्मिक स्थलों का भी अभूतपूर्व विकास हो रहा है। काशी विश्वनाथ धाम में पहले जहां दस श्रद्धालु एक साथ दर्शन नहीं कर पाते थे, आज वहां 50 हजार श्रद्धालु एक साथ दर्शन कर सकते हैं। मथुरा-वृंदावन सज-संवर रहा है। मां विंध्यवासिनी धाम में सुविधाओं का विस्तार हुआ है। लखीमपुर खीरी के गोला गोकर्णनाथ में कॉरिडोर का निर्माण हो रहा है और बरेली फिर से नाथ नगरी के रूप में अपनी पहचान बना रही है। यह विकास की अभिनव यात्रा है, जिसकी शुरुआत आस्था से होती है।
महर्षि वाल्मीकि ने दुनिया को दिया प्रभु श्रीराम के आदर्शों का संदेश
उन्होंने महर्षि वाल्मीकि का उल्लेख करते हुए कहा कि राम से दुनिया का पहला संवाद महर्षि वाल्मीकि ने कराया। उन्होंने आदि रामायण की रचना कर संस्कृत में दुनिया की पहली रामायण लिखी। आज दुनिया की कोई ऐसी भाषा नहीं है, जिसमें रामायण न लिखी गई हो लेकिन इसका मूल आधार महर्षि वाल्मीकि हैं। उन्होंने श्रीराम को धर्म का साक्षात स्वरूप बताते हुए कहा कि महर्षि वाल्मीकि का कथन 'रामो विग्रहवान धर्मः' आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है। जीवन में जब भी कोई चुनौती या समस्या आती है तो श्रीराम के आदर्श उसके समाधान का मार्ग दिखाते हैं। पुत्र, शिष्य, गुरु, पति, भाई और समाज के महत्वपूर्ण व्यक्ति के रूप में मर्यादित आचरण की प्रेरणा प्रभु श्रीराम से मिलती है।
महंत योगी शांतिनाथ जी को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वह एक फक्कड़ और निराले संत थे। उनका जीवन सहज और अपनी ही मस्ती में रहने वाला था। अच्छे कार्यों में भी वे सहयोगी बनते थे। जीवन नश्वर है और अंततः सभी को इसे स्वीकार करना पड़ता है। उनके शरीर शांत होने के बाद यहां समाधि दी गई।
इस अवसर पर शक्तिपीठ देवीपाटन के महंत मिथिलेश महाराज, श्री हनुमान गढ़ी मंदिर अयोध्या धाम से विराजमान महंत राजूदास, उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और प्रभारी मंत्री पीलीभीत सरदार बलदेव सिंह औलख, मंत्री संजय गंगवार, आयोजन समिति के अध्यक्ष एवं विधान परिषद सदस्य डॉक्टर सुधीर गुप्ता, सहसंयोजक संजीव प्रताप सिंह, भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष गोकुल प्रसाद मौर्य, विधायक बिसलपुर विवेक वर्मा, पूरणपुर के विधायक बाबूराम पासवान, बरखेड़ा के विधायक स्वामी प्रवक्तानंद, जिला पंचायत प्रशासक पीलीभीत दलजीत कौर, पूज्य संत जन और भक्तजन उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / शिव सिंह

