नमामि गंगे : नदियों की निर्मलता के लिए पूर्व की सरकार की तुलना में मुख्यमंत्री योगी ने किया 10 गुना काम
नमामि गंगे : 2017 से पहले केवल 5 एसटीपी किए जा सके इंस्टॉल
9 साल में नमामि गंगे योजना के तहत 10 गुना बढ़े सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट
2017 के बाद योगी सरकार ने 50 एसटीपी किए इंस्टॉल
लखनऊ, 22 मार्च (हि.स.)। उत्तर प्रदेश में नदियों की निर्मलता और गंदे पानी के शोधन के काम में योगी सरकार ने नौ वर्षों में रफ्तार कई गुना बढ़ा दी है। 2017 से पहले जहां नमामि गंगे के तहत सिर्फ 05 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) इंस्टॉल हो पाए थे, वहीं 2017 के बाद पिछले 09 साल में ऐसे 50 से अधिक एसटीपी इंस्टॉल किए गए हैं, यानी इस अवधि में क्षमता लगभग 10 गुना बढ़ी है।
प्रदेश में लगभग 160 एसटीपी इंस्टॉल किए गए हैं, जिनके माध्यम से प्रतिदिन लगभग पांच हजार मिलियन लीटर (एमएलडी) वेस्ट वाटर को शुद्ध कर नदियों में जाने से रोका जा रहा है। पूर्व की सरकारों की तुलना में मौजूदा योगी सरकार में सीवर शोधन ढांचे के विस्तार की रफ्तार लगभग दस गुना तक बढ़ी है।
नमामि गंगे : 9 साल में 10 गुना बढ़े एसटीपी
नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत उत्तर प्रदेश में चरणबद्ध तरीके से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों की संरचना तैयार की जा रही है। 2017 से पहले जहां नमामि गंगे के अंतर्गत केवल 05 एसटीपी इंस्टॉल हो सके थे, वहीं योगी सरकार में 50 से अधिक नए एसटीपी इंस्टॉल किए गए हैं।
लखनऊ में 09 संचालित एसटीपी, 624.50 एमएलडी की क्षमता
राजधानी लखनऊ में इस समय कुल 09 सीवेज शोधन संयंत्र संचालित हैं, जिनकी कुल शोधन क्षमता 624.50 एमएलडी है। इन संयंत्रों के जरिए गोमती एवं उसकी सहायक नदियों में गिरने वाले पानी को पहले ही शुद्ध किया जा रहा है।
संचालित एसटीपी भरवारा, दौलतगंज (शहरी), दौलतगंज (ग्रामीण), हाथी पार्क, जीएच कैनाल, वृंदावन, यूपी आवास विकास परिषद क्षेत्र और सीजी सिटी आदि स्थानों पर स्थापित हैं। इन प्लांटों से निकला ट्रीटेड वॉटर एक ओर नदियों को स्वच्छ रखने में मदद कर रहा है, वहीं चरणबद्ध तरीके से इसके पुन: उपयोग (रीयूज) की योजना भी तैयार की जा रही है।
लखनऊ में 3 निर्माणाधीन और 4 प्रस्तावित एसटीपी
लखनऊ में नमामि गंगे परियोजना के अंतर्गत राज्य स्वच्छ गंगा मिशन द्वारा कुल 03 एसटीपी निर्माणाधीन हैं, जिनकी संयुक्त क्षमता 153.50 एमएलडी होगी। ये प्लांट बारिकल, लोनियांपुरवा और बिजनौर क्षेत्रों में बनाए जा रहे हैं।
राजधानी में सीवेज शोधन क्षमता पहुंचेगी 1000 एमएलडी के पार
इसके अलावा लखनऊ में 04 नए एसटीपी बसंत कुंज, वजीरगंज, जियामऊ और मस्तेमऊ के निर्माण का प्रस्ताव है, जिनकी कुल क्षमता 342 एमएलडी होगी। इन संयंत्रों के तैयार हो जाने के बाद राजधानी में सीवेज शोधन क्षमता 1000 एमएलडी से अधिक पहुंचने का अनुमान है।
2017 से पहले नदियों की निर्मलता कागजों तक सीमित रही
प्रदेश सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि 2017 से पहले नदियों की निर्मलता की योजनाएं कागजों तक सीमित रहीं और एसटीपी निर्माण की रफ्तार बेहद सुस्त थी। वहीं, योगी सरकार में नए प्लांटों के साथ-साथ पुराने संयंत्रों के उन्नयन पर भी विशेष जोर दिया गया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / शिव सिंह

