योगी सरकार में महिला सुरक्षा, सम्मान व स्वावलंबन की बढ़ी जागरूकता

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गोरखपुर, 22 मार्च (हि.स.)। योगी सरकार ने अपने पहले कार्यकाल से ही महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन पर विशेष ध्यान दिया है। इसके लिए मिशन शक्ति की पहुंच हर गांव, मोहल्ले में सुनिश्चित की गई तो साथ ही महिला स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक रूप से सुदृढ़ कर ग्रामीण घरेलू महिलाओं को आजीविका के पथ पर अग्रसर किया गया।

नारी गरिमा सम्मान और महिलाओं का सशक्तिकरण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए सिर्फ भाव नहीं बल्कि संकल्प है। यह विरासत में मिली उनकी निजी प्रतिबद्धता का भी कार्यक्षेत्र है। वह जिस गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर हैं, वहां नवरात्र में कन्या के पांव पखारने की परंपरा में भी नारी शक्ति के प्रति भक्ति का भाव प्रतिष्ठित होता है। नारी शक्ति की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मिशन शक्ति की शुरुआत भी वर्ष 2020 में नवरात्र के शुभ अवसर पर की थी। वर्तमान समय में मिशन शक्ति अपने पांचवें चरण में जारी है।

22 सितंबर 2025 को शुरू हुए मिशन शक्ति के पांचवें चरण में गोरखपुर में महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन के लिए चलाए गए 19 प्रकार के अभियानों के तहत 17 लाख 88 हजार 961 लोगों को जागरूक किया गया। गोरखपुर के जिला प्रोबेशन अधिकारी समर बहादुर सरोज के अनुसार इसमें महिलाओं की संख्या 10 लाख 88 हजार 364 रही, जिन्हें उनके अधिकार बताए गए और शिक्षा, स्वास्थ्य, समानता के साथ ही आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया गया। जबकि 7 लाख 597 पुरुषों को भी महिला अधिकारों के प्रति अपने दायित्व निभाने के लिए जागरूक किया गया।

गेम चेंजर बन रहा ग्रामीण आजीविका मिशन

महिलाओं को जागरूक करने के अलावा उन्हें आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने के लिए भी सरकार ने सतत सजगता दिखाई है। इसमें ग्रामीण आजीविका मिशन की भूमिका गेम चेंजर की नजर आती है। उपायुक्त स्वतः रोजगार नीरजा गुप्ता बताती हैं कि ग्रामीण आजीविका मिशन ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं का जीवन संवारने में मददगार साबित हो रहा है। अकेले गोरखपुर में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत 21106 महिला स्वयं सहायता समूहों का गठन हो चुका है जिसमें करीब तीन लाख महिलाएं आच्छादित हैं। मिशन से जुड़कर और प्रशिक्षण प्राप्त कर गांव की महिलाएं सब्जी उत्पादन, नमकीन उत्पादन, मशरूम उत्पादन, शहद उत्पादन, पशु पालन, कृषि कार्य, मसाला उत्पादन, कृत्रिम आभूषण निर्माण, बैग, ड्रेस, सॉफ्ट टॉयज, फाइल फोल्डर बनाने के साथ पुष्टाहार उत्पादन से जुड़कर आय अर्जित कर अपना जीवन समुन्नत बना रही हैं। गोरखपुर कुल सक्रिय 21106 समूहों में से 629 का गठन वित्तीय वर्ष 2025-26 में हुआ है। इस वित्तीय वर्ष में 7950 नई सदस्य महिलाओं को जोड़ा गया है।

जिले में अब तक कुल 18446 समूहों को रिवॉल्विंग फंड निर्गत किया गया है। इनमें इस वित्तीय वर्ष में रिवॉल्विंग फंड पाने वाले 1006 समूह भी सम्मिलित हैं। समूहों को करीब 30 करोड़ रुपये की धनराशि रिवॉल्विंग फंड मद में दी गई है। इसके अलावा समूहों के संचालन के लिए एनआरएलएम के तहत सामुदायिक निवेश निधि (सीआईएफ) से भी लाभान्वित किया जाता है। गोरखपुर में 15558 समूहों को समुदाय8निवेश निधि का लाभ मिला है। समूहों की आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने में बैंकों के कैश क्रेडिट लिंकेज (सीसीएल) की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसमें बैंक द्वारा 6 लाख रुपये तक की लिमिट जारी की जाती है। प्रथम वर्ष 1 लाख 50 हजार रुपये की लिमिट होती है और सही व नियमित लेनदेन पर दूसरे किस्त में 3 लाख तथा तीसरे किस्त में यह लिमिट बढ़कर 6 लाख रुपये हो जाती है। मूल रूप से इस धनराशि का उपयोग समूह सदस्य आजीविका संवर्धन में करते हैं। गोरखपुर में अब तक 12210 समूहों को सीसीएल जारी हो चुकी है।

डेयरी सेक्टर में महिलाओं ने किया कमाल

योगी सरकार के प्रोत्साहन से महिलाएं डेयरी सेक्टर से जुड़कर आर्थिक स्वावलंबन हासिल करने में कमाल कर रही हैं। ग्रामीण महिलाओं को डेयरी सेक्टर से जोड़ने के लिए सीएम योगी की मंशा के अनुरूप गोरखपुर में राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के सहयोग से श्री बाबा गोरखनाथ कृपा मिल्क प्रोडयूसर्स ऑर्गनाइजेशन का गठन किया गया है। इससे गोरखपुर के साथ ही देवरिया, कुशीनगर, महराजगंज, संतकबीरनगर, मऊ और आजमगढ़ की महिलाएं भी जुड़ी हैं। महिलाओं की सहभागिता वाले इस मिल्क प्रोडयूसर्स ऑर्गनाइजेशन ने ढाई साल में दो सौ करोड़ रुपये का टर्नओवर हासिल कर लिया है। गोरखपुर की हजारों महिलाएं दुग्ध उत्पादन व संग्रह के काम में लगकर प्रतिमाह आठ से दस हजार रुपये की आमदनी प्राप्त कर रही हैं। इस कार्य से जुड़ी कई महिलाएं तो लखपति दीदी भी बन गईं है।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय

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