नव निर्माण के 09 वर्ष में एमएसएमई : 96 लाख इकाइयों के साथ में देश में नंबर-1 उत्तर प्रदेश

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नव निर्माण के 09 वर्ष में एमएसएमई : 96 लाख इकाइयों के साथ में देश में नंबर-1 उत्तर प्रदेश


-एमएसएमई का हब बना उत्तर प्रदेश, 9 वर्षों में छोटे उद्योगों से बड़े विकास की लिखी कहानी

-योजनाओं के दम पर करोड़ों लोगों को मिला रोजगार, गांव से ग्लोबल मार्केट तक पहुंचा यूपी का हुनर

-ओडीओपी और पारंपरिक कारीगरों को मिली नई पहचान, नई औद्योगिक योजनाएं बन रहीं भविष्य का विजन

लखनऊ, 27 मार्च (हि.स.)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में बीते 09 वर्षों में उत्तर प्रदेश ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई) के क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम की है। आज प्रदेश 96 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयों के साथ देश का सबसे बड़ा औद्योगिक हब बन चुका है। यह केवल आंकड़ों की उपलब्धि नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के जीवन में आए आर्थिक बदलाव और आत्मनिर्भरता की कहानी है।

उत्तर प्रदेश ने एमएसएमई सेक्टर को अपनी आर्थिक रीढ़ के रूप में विकसित किया है। 96 लाख से अधिक इकाइयों के माध्यम से प्रदेश न केवल देश में प्रथम स्थान पर है, बल्कि यह क्षेत्र बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन का आधार भी बन चुका है। छोटे उद्योगों को आसान वित्त, प्रशिक्षण और बाजार उपलब्ध कराने के लिए नीतिगत सुधारों ने इस सेक्टर को मजबूती दी है।

योजनाओं से लाखों को मिला अवसर

युवाओं को रोजगार देने के साथ-साथ उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई योजनाएं प्रभावी रूप से लागू की गई हैं। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के तहत अब तक 1,47,312 युवाओं को लाभान्वित किया गया है, जिससे 4,51,775 रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं। सरकार का लक्ष्य हर वर्ष 01 लाख नई सूक्ष्म इकाइयां स्थापित करना है, जिससे रोजगार का दायरा और बढ़ेगा।

मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के अंतर्गत 37,280 लाभार्थियों को 94,086 लाख रुपये की मार्जिन मनी प्रदान की गई है, जिससे 2,98,240 लोगों को रोजगार मिला है। इसी तरह, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) के तहत 32,936 लाभार्थियों को 1,10,550 लाख रुपय की सहायता दी गई, जिससे 2,63,488 रोजगार सृजित हुए हैं।

ओडीओपी और पारंपरिक कारीगरों को नई पहचान

वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) योजना ने उत्तर प्रदेश के पारंपरिक उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई है। इस योजना के तहत 20,396 लोगों को 90,364 लाख रुपये की मार्जिन मनी प्रदान की गई, जिससे 3,26,473 रोजगार सृजित हुए। वहीं, विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के माध्यम से पारंपरिक कारीगरों (बढ़ई, दर्जी, लोहार, कुम्हार, बुनकर, सुनार, नाई आदि) को सशक्त बनाया गया है। वर्ष 2019 से संचालित इस योजना के तहत अब तक 4,20,540 लोगों को प्रशिक्षण और आधुनिक टूलकिट प्रदान की गई है, जिससे उनकी आय और उत्पादकता में वृद्धि हुई है। सरकार अब ओडीओपी से प्रेरित ‘एक जनपद एक व्यंजन (ओडीओसी)’ पहल के जरिए हर जिले को उसके पारंपरिक व्यंजन के आधार पर नई पहचान देने की दिशा में काम कर रही है, जिससे स्थानीय रोजगार और पर्यटन दोनों को बढ़ावा मिलेगा।

नई औद्योगिक योजनाएं और भविष्य का विजन

औद्योगिक आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के लिए वर्ष 2023 में प्लेज स्कीम उत्तर प्रदेश में लागू की गई, जिसका उद्देश्य उद्योगों के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित करना है। इसके साथ ही प्रत्येक जनपद में सरदार वल्लभभाई पटेल एम्प्लायमेंट एंड इंडस्ट्रियल जोन स्थापित करने का निर्णय लिया गया है, जिससे स्थानीय स्तर पर उद्योगों का विस्तार होगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। प्रदेश सरकार का फोकस अब एमएसएमई को ग्लोबल सप्लाई चेन से जोड़ने, निर्यात बढ़ाने और तकनीकी उन्नयन पर है। आने वाले वर्षों में यह सेक्टर न केवल प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा, बल्कि उत्तर प्रदेश को ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी बनाने में भी अहम भूमिका निभाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / शिव सिंह

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