प्रगति पोर्टल के माध्यम से समय और लागत की बर्बादी रुकी है : योगी आदित्यनाथ

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प्रगति पोर्टल के माध्यम से समय और लागत की बर्बादी रुकी है : योगी आदित्यनाथ


- सीएम याेगी ने पत्रकार वार्ता में दी जानकारी

लखनऊ, 13 जनवरी (हि.स.)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को कहा कि प्रगति पोर्टल (प्रोएक्टिव गवर्नेंस एण्ड टाइमली इंप्लीमेंटेशन) ने मिनिमम गवर्नमेंट और मैक्सिमम गवर्नेंस को सार्थकता प्रदान की है। प्रगति पोर्टल से समय और लागत की बर्बादी रुकी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगति के माध्यम से देश नई ऊंचाइयों को छू रहा है तो उत्तर प्रदेश देश का ग्रोथ इंजन बनकर उभरा है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को अपने सरकारी आवास पांच कालिदास मार्ग पर पत्रकार वार्ता कर प्रगति पोर्टल के माध्यम से प्रदेश और देश को हो रहे लाभ के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2014 में सत्ता में आने के साथ ही डिजिटलीकरण को बढ़ावा देना शुरू कर दिया। इससे पहले उन्हाेंने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में इस कार्य का शुभारंभ राज्य स्तर पर किया था। उसी क्रम में 2015 में प्रगति पोर्टल लांच किया गया । यह केवल देश के अंदर बड़े प्रोज्क्ट की समीक्षा ही नहीं है बल्कि देश के अंदर एक नयी कार्य संस्कृति का उदाहरण बन चुका है। इसकी मानिटरिंग प्रधानमंत्री कार्यालय से की जा रही है। इस पोर्टल के माध्यम से केन्द्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय बनाकर योजनाओं को आगे बढ़ाने का कार्य किया जा रहा है। इसी प्रकार अलग-अलग राज्य की सरकारों और सरकारों में विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर सरकार की योजनाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि आज जो कुछ भी परिणाम देखने को मिल रहा है, वह प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में बेहतरीन टेक्नालॉजी का इस्तेमाल करने से संभव हो पा रहा है। वर्ष 2003 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नागरिक शिकायतों और जवाबदेही बनाने के उद्देश्य से इसे विकसित किया था। प्रगति उसी का राष्ट्रीय स्वरूप है। मतलब प्रोएक्टिव गवर्नेंश एण्ड टाइमली इंप्लीमेंटेशन का मतलब है कि मिनिमम गवर्नमेंट मैक्सिमम गवर्नेंस का यह पोर्टल महत्वपूर्ण आधार बना है। इसके माध्यम से निर्णय तेज हुए हैं। इससे समय और लागत की बर्बादी रुकी है। केन्द्र और राज्य के मंत्रालयों विभागों के बीच समन्वय मजबूत हुआ है। जवाबदेही तय हुई है।

उन्हाेंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर देखा जाए तो प्रगति के माध्यम से 86 लाख करोड़ की परियोजनाओं को गति मिली है। जिनमें 377 प्रमुख परियोजनाओं को सीधे प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर समीक्षा की जाती है। 3152 में 2958 मुद्दों का समाधान हुआ है। यह केवल आंकड़ा नहीं है। सरकार के कार्य भी दर्शाता है। उप्र जैसे राज्य को देखें तो प्रगति गेंम चेंजर के रूप में साबित हुआ है। उप्र देश का ग्रोथ इंजन बनकर उभरा है। आज उप्र की नई पहचान बनी है। इस मौके पर उप्र सरकार के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना मौजूद रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / दिलीप शुक्ला

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