तकनीक की मदद से रजिस्ट्री कार्यालयों को बनाएं पारदर्शिता और जनसुविधा का आदर्श मॉडल : मुख्यमंत्री योगी

WhatsApp Channel Join Now
तकनीक की मदद से रजिस्ट्री कार्यालयों को बनाएं पारदर्शिता और जनसुविधा का आदर्श मॉडल : मुख्यमंत्री योगी


-पिछले एक दशक में विभागीय आय लगभग तीन गुना, डिजिटल सेवाओं के विस्तार पर मुख्यमंत्री का जोर

लखनऊ, 08 जून (हि.स.)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को स्टाम्प एवं पंजीयन विभाग के कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, निवेश गतिविधियों और शहरीकरण की आवश्यकताओं के अनुरूप विभाग को अधिक पारदर्शी, तकनीक आधारित, उत्तरदायी और जनसुविधा केंद्रित बनाया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रजिस्ट्री कार्यालय आमजन के प्रत्यक्ष संपर्क वाले कार्यालय हैं, इसलिए वहां की व्यवस्थाएं आधुनिक, व्यवस्थित और नागरिक केंद्रित होनी चाहिए। उन्होंने उप निबंधक कार्यालयों को चरणबद्ध ढंग से पासपोर्ट सेवा केंद्रों की तर्ज पर विकसित करने की आवश्यकता बताई।

बैठक में बताया गया कि प्रदेश के रजिस्ट्री कार्यालयों में प्रतिवर्ष लगभग 2.4 करोड़ लोगों का प्रत्यक्ष संपर्क होता है। इसे देखते हुए हेल्प डेस्क, टोकन एवं क्यू मैनेजमेंट सिस्टम, आधुनिक प्रतीक्षालय, महिला एवं शिशु कक्ष, डिजिटल सुविधाएं तथा अन्य नागरिक सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए जिससे नागरिकों को अनावश्यक प्रतीक्षा और असुविधा का सामना न करना पड़े।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्टाम्प एवं पंजीयन विभाग राज्य की राजस्व व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2016-17 में विभाग की सकल आय 11 हजार 613.84 करोड़ रुपये थी, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर 32 हजार द598.49 करोड़ रुपये हो गई है। इसी अवधि में पंजीकृत लेखपत्रों की संख्या 28.25 लाख से बढ़कर 49.34 लाख से अधिक हो गई। मुख्यमंत्री ने इस प्रगति को आगे बढ़ाते हुए राजस्व वृद्धि के साथ सेवा गुणवत्ता और नागरिक संतुष्टि को भी प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि डिजिटल गवर्नेंस विभागीय सुधारों का प्रमुख आधार बनना चाहिए। संपत्ति एवं विवाह पंजीकरण में आधार प्रमाणीकरण, बायोमेट्रिक और आईरिस आधारित सत्यापन, ऑनलाइन दस्तावेज सत्यापन तथा खतौनी आधारित डिजिटल जांच जैसी व्यवस्थाओं को और सुदृढ़ किया जाए। पेपरलेस रजिस्ट्रेशन प्रणाली, अभिलेखों के डिजिटाइजेशन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित कार्यप्रणाली तथा जियो-टैगिंग व्यवस्था को तेजी से लागू करने की दिशा में प्रभावी कार्यवाही की जाए। उन्होंने कहा कि तकनीक के माध्यम से पारदर्शिता बढ़ाने, विवाद कम करने और राजस्व अपवंचन रोकने में मदद मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि संपत्तियों के मूल्यांकन में एकरूपता और पारदर्शिता लाने के लिए मानकीकृत मूल्यांकन व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए। इससे बाजार आधारित मूल्यांकन सुनिश्चित होगा तथा मूल्यांकन संबंधी विवादों में कमी आएगी।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश तेजी से निवेश और औद्योगिक विकास का केंद्र बन रहा है। ऐसे में विधिक व्यवस्थाओं को भी वर्तमान आर्थिक और व्यावसायिक आवश्यकताओं के अनुरूप बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि व्यवस्थाओं में स्पष्टता होने से निवेशकों का विश्वास बढ़ता है, अनावश्यक विवाद और मुकदमेबाजी कम होती है तथा कारोबार करने की सुगमता को बल मिलता है।

बैठक में कॉरपोरेट पुनर्गठन, विलय, विभाजन, समामेलन, अधिग्रहण, सीमित दायित्व भागीदारी (एलएलपी), शेयरधारिता में परिवर्तन, आवासीय सहकारी समितियों तथा रेरा के अंतर्गत विक्रय करारों से जुड़े विषयों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इन क्षेत्रों में स्पष्ट और व्यावहारिक स्टाम्प शुल्क व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि विभिन्न राज्यों की सर्वोत्तम व्यवस्थाओं का अध्ययन करते हुए ऐसा विधिक ढांचा तैयार किया जाए जिससे निवेश को प्रोत्साहन मिले, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस मजबूत हो, विवादों में कमी आए और राज्य के राजस्व हित भी सुरक्षित रहें।

हिन्दुस्थान समाचार / दिलीप शुक्ला

Share this story