(रामकथा अपडेट) राम काे अपने जीवन का आदर्श बनाने वालाें का हुआ कल्याण : योगी आदित्यनाथ

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(रामकथा अपडेट) राम काे अपने जीवन का आदर्श बनाने वालाें का हुआ कल्याण : योगी आदित्यनाथ


-जिनके मन में देश के प्रति आस्था व निष्ठा नहीं, उनके लिए भारत की धऱती धर्मशाला नहीं हो सकतीः मुख्यमंत्री

-9 दिवसीय रामकथा महोत्सव के समापन समारोह में पहुंचे मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ

-राम से द्रोह करने वालों को धरती पर जगह नहीं मिली: मुख्यमंत्री योगी

-मुख्यमंत्री ने कहा, लव व लैंड जिहाद के विरुद्ध समाज को एकजुट होकर खड़ा होना होगा

- राम नाम में जीवन की हर समस्या का समाधानः गोरक्षपीठाधीश्वर

लखनऊ, 09 जून (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जिसने प्रभु श्रीराम को अपने जीवन का आदर्श बनाया, उसका कल्याण हुआ है और जिसने राम से द्रोह किया है, उसकाे इस धरती पर कहीं जगह नहीं मिली है। मारीच, खरदूषण और रावण का क्या हश्र हुआ। नारी गरिमा का कैसे ध्यान रखना है, लव जेहाद के खिलाफ कैसे आवाज उठानी है, उसका यह उदाहरण आप सबके सामने है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार को सीतापुर रोड स्थित सेवा अस्पताल परिसर में चल रही पद्मविभूषण तुलसीपीठाधीश्वर जगद्गुरू रामभद्राचार्य की राम कथा के अंतिम दिन पहुंचे। मुख्यमंत्री ने व्यास पीठ पर पुष्प अर्पित कर पूजन किया। रामभद्राचार्य का माल्यार्पण किया। वहीं जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अंग वस्त्र ओढ़ाकर उन्हें आशीर्वाद दिया।

इस अवसर पर अपने संबोधन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लव जेहाद के प्रति लोगों को सजग किया। उन्होंने कहा कि केरल उच्च न्यायालय ने 2009 में इसको लेकर चिंता व्यक्त की। तब भी हम उस पर ध्यान नहीं दिए। हमने उप्र में 2020 में इस पर कानून बनाया। तब भी इस पर व्यापक जनजागरूकता की जरूरत है। उन्हाेंने कहा कि रामायण काल खण्ड के उदाहरण आपके सामने हैं। मारीच हैं, रावण हैं। उच्च कुल और श्रेष्ठ व्यवस्था में जन्म लेते हैं लेकिन पशुवत मारे जाते हैं। हमारे पवनसुत हनुमान जी, विभीषण हैं, सामान्य जीवन में जन्म के समय और उसके उपरांत भले ही उस प्रकार सम्मान न मिला हो, राम की संगत में आने के बाद पूज्य हो गए। सबके लिए पूज्य हो गए। हम प्रात:काल जिन सात नामों का स्मरण करते हैं उनमें विभीषण का भी नाम है। हमारे यहां हर समस्या का समाधान, हम किसी को मानते हैं, हम बचपन से देखते आए हैं कि गांव का अनपढ़ व्यक्ति भी होगा, उसे हनुमान चालीसा जरूर याद होगी। हनुमान चालीसा जरूर याद करके रखता है। यह है ताकत।

मुख्यमंत्री याेगी ने कहा कि 491 वर्ष तक श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन चलता रहा। 2019 में सर्वोच्च न्यायालय की फुल बेंच के न्यायमूर्तियों ने अपने फैसले में कहा कि जहां रामलला विराजमान हैं, वहीं रामजन्मभूमि है। इसे लेकर साक्ष्य-प्रमाण और विद्वानों के वक्तव्य भी दिए गए थे। सर्वोच्च न्यायालय के एक न्यायमूर्ति ने स्वामी रामभद्राचार्य जी के बारे में कहा कि जब मैंने उनके वक्तव्य को सुना तो लगा कि सनातन धर्मावलंबियों के साथ सैकड़ों वर्षों से अन्याय हो रहा था।

उन्हाेंने कहा कि आप सब सौभाग्यशाली हैं कि तुलसीपीठाधीश्वर के श्रीमुख से इस पावन कथा का श्रवण करने का सौभाग्य प्रात् हुआ है। हम लोग इसीलिए कहते हैं। मध्यकाल में तुलसी दास जी ने समाज के एकजुट होने की, विदेशी आक्रांताओं के सचेत होने की की चेतना जागृत की। प्रभु श्रीराम के प्रति भक्ति का संदेश देकर उन्होंने पूरे उत्तर भारत को एकता के सूत्र में जोड़ने का कार्य किया था। वही कार्य आज जगद्गुरु रामानंदाचार्य तुलसीपीठाधीश्वर रामभद्रचार्य जी कर रहे हैं। उनके श्रीमुख से पाव कथा श्रवण करने का सौभाग्य आप सबको प्राप्त हो रहा है। कथा केवल सुनने के लिए नहीं है। कथा के मर्म को समझें और अपने जीवन में उतारने का प्रयास करें। राम के आदर्श को अपने जीवन में उतारें।

यह कथा भारतीय जनता पार्टी के विधायक डॉ. नीरज बोरा की ओर से आयोजित की गयी है। कथा आरम्भ से पहले ही आयोजन समिति के सदस्यों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर उन्हें आमंत्रित किया था। मुख्यमंत्री ने कथा के आयोजन को लेकर पोस्टर भी जारी किया था।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिलीप शुक्ला

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