उप्र की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रही हैं विकास परियोजनाएं : जयवीर सिंह

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उप्र की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रही हैं विकास परियोजनाएं : जयवीर सिंह


-योगी सरकार ने संवारी सांस्कृतिक धरोहर, लगभग 3 सालों में 21 बड़ी परियोजनाएं हुईं पूरी

-प्रदेश की बदली सांस्कृतिक तस्वीर, धरातल पर लगभग 120 करोड़ की परियोजनाएं

लखनऊ, 13 जुलाई (हि.स.)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और विकास को नई गति मिल रही है। प्रदेश के अलग-अलग जिलों में संस्कृति विभाग की लगभग 119.47 करोड़ रुपये की लागत वाली 21 महत्वपूर्ण परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं। इनमें रामलीला स्थलों का विकास, सांस्कृतिक केंद्र, स्मारक, संग्रहालय, संगीत महाविद्यालय और नाट्य संस्थानों के आधुनिकीकरण जैसी परियोजनाएं शामिल हैं, जो प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को नई मजबूती देने के साथ पर्यटन को भी बढ़ावा देंगी। और जल्द ही ये सभी परियोजनाएं जनमानस के लिए लोकार्पित की जाएंगी।

इस पर प्रदेश के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि, विभाग की अद्यतन प्रगति रिपोर्ट के अनुसार मैनपुरी, गोरखपुर, बांदा, फिरोजाबाद, हरदोई, कुशीनगर, प्रतापगढ़, अलीगढ़, बलिया और अन्य जनपदों में सार्वजनिक रामलीला स्थलों के सौंदर्यीकरण, बाउंड्रीवाल, मंच, गेट, शेड, छाया कुंज और अन्य विकास कार्य पूरे हो चुके हैं।

उन्होंने बताया प्रदेश में सांस्कृतिक अधोसंरचना को मजबूत करने की दिशा में कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं भी पूरी हो चुकी हैं। चित्रकूट में महर्षि वाल्मीकि सांस्कृतिक केंद्र, आजमगढ़ के हरिहरपुर में संगीत महाविद्यालय, लखनऊ में डॉ. भीमराव आंबेडकर स्मारक एवं सांस्कृतिक केंद्र तथा उसके संग्रहालय के आंतरिक कार्य, भारतेन्दु नाट्य अकादमी के नवीनीकरण एवं इंटीरियर, शाहजहांपुर के स्वतंत्रता संग्राम संग्रहालय में फसाड लाइटिंग और म्यूजिकल फाउंटेन तथा फतेहपुर में शहीद त्रिदेव प्रसाद स्मारक के निर्माण कार्य भी पूर्ण किए जा चुके हैं।

प्रदेश सरकार ने केवल धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों तक ही विकास को सीमित नहीं रखा है, बल्कि विरासत और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े नए आयाम भी जोड़े हैं। कन्नौज में अंतरराष्ट्रीय रोमा समुदाय को समर्पित स्मारक एवं मुक्ताकाशी मंच का निर्माण पूरा हो चुका है और इसके हस्तांतरण की प्रक्रिया चल रही है। वहीं बलिया के रसड़ा स्थित नाथ बाबा मेला मैदान में रिटेनिंग वॉल, मरम्मत और प्रकाश व्यवस्था के विकास कार्य पूरे हो चुके हैं। इन परियोजनाओं से प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने का प्रयास किया गया है।

रामलीला स्थलों के विकास को लेकर भी व्यापक स्तर पर कार्य किया गया है। मैनपुरी के कुसमरा, कुरावली और भोगांव, गोरखपुर के तरकुलही, बांदा के अलीगंज, फिरोजाबाद के खेरिया और नौशहरा, हरदोई के संडीला, कुशीनगर, प्रतापगढ़ और अलीगढ़ सहित अनेक जनपदों में रामलीला मैदानों का कायाकल्प किया गया है। इन स्थलों पर बाउंड्रीवाल, मंच, गेट, शेड और अन्य आवश्यक अधोसंरचना विकसित होने से धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री ने बताया कि, अधिकांश परियोजनाओं में निर्माण कार्य निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप पूरे कर लिए गए हैं। इन परियोजनाओं से उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को नई मजबूती मिलेगी और प्रदेश की ऐतिहासिक, धार्मिक तथा सांस्कृतिक धरोहरें आधुनिक स्वरूप के साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और सुलभ बन सकेंगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / मोहित वर्मा

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