अशोक सिंघल ने हजारों संतों को एकजुट कर उनके सहयोग से तीन लाख गांवों तक पहुंचाया राम मंदिर आंदोलन का संदेश : चंपत राय
बिजनौर, 12 अक्टूबर (हि.स.)। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के पूर्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंघल की जन्म शताब्दी के अवसर पर बिजनौर के नुमाइश मैदान में कार्यक्रम आयोजित किया गया। समारोह में विहिप के केंद्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय और उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने अशोक सिंघल के जीवन, विचारों और राम मंदिर आंदोलन में उनके योगदान को याद किया। कार्यक्रम में शारदा पीठाधीश्वर स्वामी राजेश्वराश्रम महाराज भी मौजूद रहे।
चंपत राय ने कहा कि अशोक सिंघल ने देशभर में करीब 15 हजार संतों को एकजुट किया और उनके सहयोग से राम मंदिर आंदोलन का संदेश लगभग तीन लाख गांवों तक पहुंचाया। उन्होंने बताया कि सिंघल किसी भी अभियान को शुरू करने से पहले योजना बनाते थे। संतों से विचार-विमर्श और उनकी सहमति के बाद ही आगे बढ़ते थे। इसी रणनीति के तहत उन्होंने राम मंदिर आंदोलन को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया।
चंपत राय ने कहा कि अशोक सिंघल का प्रयास विभिन्न धार्मिक परंपराओं से जुड़े लोगों को एक मंच पर लाना था। उनका मानना था कि पूजा-पद्धतियां अलग हो सकती हैं, लेकिन सामाजिक समस्याओं के समाधान के लिए सभी को मिलकर काम करना चाहिए।
उन्होंने 1981 में तमिलनाडु के मीनाक्षीपुरम में हुए धर्मांतरण का उल्लेख करते हुए बताया कि उस समय अशोक सिंघल ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से मुलाकात की थी। धर्मांतरण के विरोध में दिल्ली में विराट हिंदू समाज के नाम से सभा भी आयोजित की गई थी। चंपत राय के अनुसार, सिंघल ने युवाओं को विश्व हिंदू परिषद से जोड़ने के साथ सामाजिक एकता के लिए भी काम किया।
उन्होंने संत रविदास की वाणी को संकलित कर पुस्तक प्रकाशित कराने और रविदासी संतों को एक मंच पर लाने के प्रयासों का भी जिक्र किया। इसके अलावा पंजाब के कठिन दौर में हरिद्वार से अमृतसर तक संतों की यात्रा निकालकर शांति और आपसी भाईचारे का संदेश देने की बात कही।
उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण किसी एक व्यक्ति के प्रयास से नहीं हुआ, बल्कि इसमें करोड़ों लोगों का योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि अशोक सिंघल ने राम मंदिर आंदोलन के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया था। उनके लिए राम मंदिर राजनीति का नहीं, बल्कि आस्था का विषय था।
महाना ने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए बताया कि एक पत्रकार ने उनसे पूछा था कि विधानसभा अध्यक्ष बनने के बाद राम जन्मभूमि को लेकर उनके क्या विचार थे। इस पर उन्होंने कहा था, ''उस दिन भी मेरे लिए राम मंदिर था, राजनीति नहीं।''
उन्होंने कहा कि अशोक सिंघल को विश्वास था कि अयोध्या में राम मंदिर जरूर बनेगा। महाना के अनुसार, सिंघल कहा करते थे कि 21वीं सदी हिंदुओं की सदी होगी।
राम मंदिर आंदोलन के दौरान जेल गए लोग
महाना ने राम मंदिर आंदोलन के दौरान हुए घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा कि बड़ी संख्या में लोग जेल जाने के लिए तैयार थे। स्थिति ऐसी हो गई थी कि जेलों में जगह कम पड़ने लगी थी। उन्होंने अपने पिता का जिक्र करते हुए बताया कि दीपावली के दिन उन्हें घर से ले जाया गया था और उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) लगा दिया गया था। उस समय परिवार को मुश्किल परिस्थितियों का सामना करना पड़ा था। महाना ने कहा कि अशोक सिंघल सभी जातियों के लोगों को समान मानते थे। उन्होंने समाज को बांटने वाले लोगों से सिंघल के जीवन से सीख लेने की बात कही।
सतीश महाना ने कहा कि जब उन्हें पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए टिकट मिला था, तब अशोक सिंघल का आशीर्वाद उनके साथ था। उन्होंने बताया कि लोग अक्सर उनसे पूछते हैं कि वह आठ बार विधायक कैसे बने। महाना ने इसके पीछे अशोक सिंघल के आशीर्वाद को भी एक वजह बताया।
कार्यक्रम के दौरान महाना ने चंपत राय की प्रशंसा की और उपस्थित लोगों से खड़े होकर तालियों के साथ उनका सम्मान करने की अपील की। राम मंदिर के लिए मिले चंदे से जुड़े हालिया घटनाक्रम का जिक्र करते हुए उन्होंने कुछ बातों पर दुख जताया, हालांकि इस संबंध में विस्तार से कुछ नहीं कहा।
कार्यक्रम के लिए नुमाइश मैदान में पंडाल और मंच तैयार किया गया था। लोगों की भीड़ को देखते हुए पुलिस बल तैनात किया गया। वाहनों की पार्किंग और लोगों के आवागमन के लिए भी व्यवस्था की गई थी। समारोह में वक्ताओं ने अशोक सिंघल के जीवन और राम मंदिर आंदोलन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखे। इस अवसर पर विहिप, भाजपा व अन्य अनुसागिंक संगठनों के पदाधिकारी व कार्यकर्ता बड़ी संख्या में मौजूद रहें |
हिन्दुस्थान समाचार / नरेन्द्र

