बीएचयू के आठ चिकित्सा शिक्षकों को एनएएमएस की सदस्यता, चिकित्सा शिक्षा और शोध के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान का सम्मान

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बीएचयू के आठ चिकित्सा शिक्षकों को एनएएमएस की सदस्यता, चिकित्सा शिक्षा और शोध के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान का सम्मान


वाराणसी, 12 अक्टूबर (हि.स.)। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के चिकित्सा विज्ञान संस्थान (आईएमएस) के आठ चिकित्सा शिक्षकों को नेशनल एकेडमी ऑफ मेडिकल साइंसेज (इंडिया), नई दिल्ली की प्रतिष्ठित सदस्यता (एमएएमएस) से सम्मानित किया गया है। चेन्नई में आयोजित नेशनल एकेडमी ऑफ मेडिकल साइंसेज (भारत) के राष्ट्रीय सम्मेलन में वर्ष 2026 के लिए यह सम्मान प्रदान किया गया। इस उपलब्धि से बीएचयू के चिकित्सा विज्ञान संस्थान का गौरव बढ़ा है।

इस उपलब्धि पर एनएएमएस आईएमएस सेल के संयोजक प्रो. टी.पी. चतुर्वेदी तथा सेल के अध्यक्ष एवं बीएचयू के चिकित्सा विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. एस.एन. संखवार ने सभी सम्मानित शिक्षकों को बधाई दी। उन्होंने इसे संस्थान के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताते हुए शिक्षकों को चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में उत्कृष्टता की नई ऊंचाइयां हासिल करने के लिए प्रोत्साहित किया।

बीएचयू के जनसंपर्क अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्ष 1961 में स्थापित नेशनल एकेडमी ऑफ मेडिकल साइंसेज (इंडिया), नई दिल्ली, देश में चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र की एक प्रतिष्ठित अकादमिक संस्था है। यह चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और स्वास्थ्य नीति के क्षेत्र में उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए कार्य करती है।

अकादमी की फेलोशिप (एफएएमएस) विशिष्ट चिकित्सा शिक्षाविदों और चिकित्सकों को प्रदान किया जाने वाला प्रतिष्ठित सम्मान है, जबकि सदस्यता (एमएएमएस) चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले शिक्षकों और शोधकर्ताओं की उपलब्धियों को मान्यता प्रदान करती है।

वर्ष 2026 में आईएमएस, बीएचयू से इस प्रतिष्ठित सदस्यता के लिए सम्मानित शिक्षकों में डॉ. भुवाल राम, डॉ. अखिलेश चंद्र, डॉ. दीपा रानी, डॉ. अभिषेक पाठक, डॉ. वरुण कुमार सिंह, डॉ. सौमिक घोष, डॉ. प्रसेनजीत बोस एवं डॉ. विश्वाम्बर शामिल हैं।

इन शिक्षकों की उपलब्धि को चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में उनके योगदान की महत्वपूर्ण मान्यता के रूप में देखा जा रहा है। इससे संस्थान के शैक्षणिक वातावरण को प्रोत्साहन मिलने के साथ ही चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने की प्रेरणा भी मिलेगी।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

Livevns.news Desk
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