भारतम मिशन के तहत यूपी की हजारों पांडुलिपियां हो रहीं डिजिटल

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भारतम मिशन के तहत यूपी की हजारों पांडुलिपियां हो रहीं डिजिटल


लखनऊ, 13 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की सदियों पुरानी साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत को डिजिटल रूप में सुरक्षित करने का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। ज्ञान भारतम मिशन के तहत प्रदेश के 06 प्रमुख संस्थानों में हजारों दुर्लभ पांडुलिपियों को स्कैन कर डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। सितंबर 2026 तक गीता प्रेस गोरखपुर, नागरी प्रचारिणी सभा, हिंदी साहित्य सम्मेलन, राजकीय पांडुलिपि पुस्तकालय, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय और वृंदावन शोध संस्थान, मथुरा में कुल 15,890 पांडुलिपियों से जुड़े 7,56,392 पन्नों को स्कैन किया जा चुका है। इनमें से 14,594 पांडुलिपियों का मेटाडाटा तैयार हुआ है, जबकि 14,208 रिकॉर्ड अपलोड किए जा चुके हैं। यह जानकारी प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने दी।

मंत्री ने बताया कि नागरी प्रचारिणी सभा में 6,720 पांडुलिपियों से जुड़े 61,175 पन्नों को स्कैन किया गया है। यहां 6,680 मेटाडाटा तैयार किए जा चुके हैं और 6,600 रिकॉर्ड डिजिटल रूप से अपलोड हुए हैं। वहीं गीता प्रेस गोरखपुर में 794 पांडुलिपियों के 1,32,264 पन्नों की स्कैनिंग की गई है। यहां 595 मेटाडाटा तैयार हुए और 570 रिकॉर्ड अपलोड किए गए हैं।

'पांडुलिपियों के डिजिटल संरक्षण से शोध होगा आसान'

मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि 'पांडुलिपियों का डिजिटल संरक्षण होने से पुरानी और दुर्लभ सामग्री को समय के साथ खराब होने से बचाने में मदद मिलेगी। साथ ही इनका व्यवस्थित डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने से शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और साहित्य एवं इतिहास से जुड़े लोगों के लिए इन सामग्रियों तक पहुंच आसान हो सकेगी। मेटाडाटा तैयार करने से प्रत्येक पांडुलिपि की पहचान और उससे जुड़ी जानकारी को व्यवस्थित तरीके से दर्ज किया जा रहा है।'

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि, 'ज्ञान भारतम मिशन के तहत चल रहा यह अभियान उत्तर प्रदेश की साहित्यिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और ज्ञान परंपरा से जुड़ी पुरानी सामग्री को नई तकनीक के जरिए सुरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया गीता प्रेस से लेकर नागरी प्रचारिणी सभा, हिंदी साहित्य सम्मेलन, संस्कृत विश्वविद्यालय और वृंदावन शोध संस्थान जैसे संस्थानों में मौजूद सामग्री का डिजिटल रूपांतरण आने वाली पीढ़ियों के लिए विरासत को सुरक्षित रखने के साथ-साथ शोध और अध्ययन के नए रास्ते भी खोलेगा।'

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हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन

Livevns.news Desk
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