तीर्थ से एक फल, संत से चार और सतगुरु से अनंत लाभ: तुलसी दास महाराज

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तीर्थ से एक फल, संत से चार और सतगुरु से अनंत लाभ: तुलसी दास महाराज


मीरजापुर, 08 मार्च (हि.स.)। हलिया विकास खंड के औरा स्थित परमहंस आश्रम में रविवार को संगीतमय भजन-कीर्तन के बाद प्रवचन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान स्वामी अड़गड़ानंद के शिष्य तुलसीदास महाराज ने भक्तों को आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान किया।

उन्होंने कहा कि तीर्थ करने से एक फल की प्राप्ति होती है, संत पुरुष के मिलने पर चार फल प्राप्त होते हैं और यदि सतगुरु मिल जाएं तो मनुष्य को अनंत लाभ मिलता है। उन्होंने भक्तों को यथार्थ गीता का पाठ करने, गुरु के स्वरूप का ध्यान करने तथा नाम जप करने की प्रेरणा दी।

तुलसी दास महाराज ने कहा कि साधना के लिए ध्याता, ध्यान और ध्येय तीनों का होना आवश्यक है, तभी भगवान की प्राप्ति संभव है। उन्होंने राम-सीता प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्हाेंने कहा कि सच्चे मन से भगवान का स्मरण करने वाले भक्त को भगवान स्वयं दर्शन देते हैं।

उन्होंने कहा कि मनुष्य को प्रतिदिन सुबह-शाम गुरु के स्वरूप का ध्यान करते हुए ‘ऊँ’, ‘राम’ और ‘शिव’ जैसे नामों का जप करना चाहिए तथा सदैव परोपकार के मार्ग पर चलना चाहिए। इससे जीवन की बाधाएं स्वतः दूर हो जाती हैं। इस अवसर पर शिब्बू बाबा, विनय बाबा, हाटा बाबा, शिव बाबू सेठ, प्रमोद अग्रहरि सहित सैकड़ों भक्तों ने प्रवचन सुना और प्रसाद ग्रहण किया।

हिन्दुस्थान समाचार / गिरजा शंकर मिश्रा

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