पहले स्वयं भरत जैसा भाई बनें, तभी परिवार में आएगी सच्ची एकता : स्वामी अड़गड़ानंद

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पहले स्वयं भरत जैसा भाई बनें, तभी परिवार में आएगी सच्ची एकता : स्वामी अड़गड़ानंद


मीरजापुर, 05 जुलाई (हि.स.)। सक्तेशगढ़ स्थित परमहंस आश्रम के प्रवचन हाल में रविवार दोपहर आयोजित सत्संग में स्वामी अड़गड़ानंद महाराज ने भाई हो तो भरत जैसा प्रसंग का मार्मिक वर्णन किया। उनके ओजस्वी प्रवचन को सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए और पूरा सभागार भक्तिरस में डूब गया।

स्वामी अड़गड़ानंद महाराज ने कहा कि रामायण काल से चली आ रही उक्ति भाई हो तो भरत जैसा आज भी समाज और परिवार के लिए आदर्श एवं प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने भरत के जीवन को त्याग, निष्ठा और समर्पण की सर्वोच्च मिसाल बताते हुए कहा कि भाईचारे का वास्तविक अर्थ अधिकार प्राप्त करना नहीं, बल्कि अपने अधिकार का भी त्याग कर भाई के सम्मान की रक्षा करना है।

उन्होंने कहा कि अयोध्या की राजगद्दी मिलने के बाद भी भरत ने उसे स्वीकार नहीं किया। भगवान राम की खड़ाऊं को सिंहासन पर स्थापित कर स्वयं नंदीग्राम में तपस्वी जीवन बिताते हुए 14 वर्षों तक राज्य का संचालन किया। यह त्याग और मर्यादा का अनुपम उदाहरण है।

प्रवचन के दौरान स्वामी जी ने कहा कि जब भगवान राम वनवास गए तो भरत ने भी राजसी सुखों का त्याग कर जटा और वल्कल धारण किए। उन्होंने कहा कि रिश्ते केवल खून से नहीं, बल्कि समर्पण और विश्वास से निभते हैं। भरत ने सिद्ध किया कि भाई का धर्म शासन करना नहीं, बल्कि भाई की मर्यादा और सम्मान की रक्षा करना है।

उन्होंने यह भी कहा कि माता कैकेयी के कारण भगवान राम को वनवास मिला, लेकिन भरत ने कभी अपनी माता के प्रति द्वेष नहीं रखा। वे भगवान राम को वापस अयोध्या लाने के लिए चित्रकूट तक गए। स्वामी जी ने कहा कि सच्चा भाई वही है, जो परिवार की मर्यादा बनाए रखने के लिए स्वयं झुक जाए, लेकिन रिश्तों को टूटने न दे।

प्रवचन के समापन पर स्वामी अड़गड़ानंद महाराज ने कहा कि आज के समय में भाई हो तो भरत जैसा का अर्थ है—स्वार्थ से ऊपर संबंधों को रखना, शिकायत के स्थान पर सेवा को अपनाना और मैं की भावना से ऊपर उठकर हम की भावना के साथ जीवन जीना।

उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान करते हुए कहा कि राम जैसा बड़ा भाई मिलना सौभाग्य की बात है, लेकिन उससे पहले हमें स्वयं भरत जैसा भाई बनने का प्रयास करना चाहिए। तभी परिवार और समाज में सच्ची एकता, प्रेम और सद्भाव स्थापित हो सकेगा।

हिन्दुस्थान समाचार / गिरजा शंकर मिश्रा

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