गुरु बिना जीवन अधूरा, भागवत कथा में बलि-वामन प्रसंग से गूंजा संदेश

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गुरु बिना जीवन अधूरा, भागवत कथा में बलि-वामन प्रसंग से गूंजा संदेश


मीरजापुर, 21 अप्रैल (हि.स.)। हलिया क्षेत्र के हथेड़ा गांव में चल रही संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन मंगलवार को कथा व्यास पंडित विष्णुधर द्विवेदी ने गुरु-शिष्य परंपरा का महत्व बताया। उन्होंने दैत्यराज बलि और भगवान वामन की कथा के माध्यम से कहा कि जब तक शिष्य पर गुरु की कृपा रहती है, तब तक उसका वैभव बना रहता है, लेकिन गुरु कृपा हटते ही सब नष्ट हो जाता है। उन्होंने कहा, “जिसके जीवन में गुरु नहीं, उसका जीवन शुरू नहीं।”

व्यास जी ने राम कथा का वर्णन करते हुए बताया कि भगवान श्रीराम ने रावण का वध तो शीघ्र कर दिया, लेकिन उसके द्वारा फैलाई गई कुरीतियों को समाप्त करने में वर्षों लग गए। उन्होंने कहा कि केवल विद्वान होना पर्याप्त नहीं, बल्कि सदाचार भी जरूरी है, वरना व्यक्ति रावण बन सकता है।

कृष्ण प्राकट्य प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि भगवान का जन्म कारागार में हुआ, लेकिन गोकुल पहुंचते ही आनंद छा गया। कथा सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। इस अवसर पर मुख्य यजमान शिव कुमारी सहित सैकड़ों भक्त उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / गिरजा शंकर मिश्रा

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