तालाब बचेंगे तो बचेगा पानी, प्रशासन ने कसी कमर

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तालाब बचेंगे तो बचेगा पानी, प्रशासन ने कसी कमर


औरैया, 02 सितंबर (हि. स.) । उत्तर प्रदेश के औरैया जनपद में नगर पंचायत बाबरपुर-अजीतमल क्षेत्र में तालाबों को अतिक्रमणमुक्त कर उनके मूल स्वरूप में वापस लाने की प्रशासनिक कवायद तेज हो गई है। जल संरक्षण और पर्यावरण संतुलन को ध्यान में रखते हुए बुधवार को अपर जिलाधिकारी अविनाश चंद्र मौर्य ने प्रशासनिक अधिकारियों और नगर पंचायत की टीम के साथ क्षेत्र के सात तालाबों का स्थलीय निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान एडीएम ने तालाबों की वर्तमान स्थिति का जायजा लिया। कई स्थानों पर गंदगी, अव्यवस्था और अतिक्रमण की स्थिति देखकर उन्होंने नाराजगी जताई। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि तालाबों की तत्काल सफाई कराई जाए और उन्हें उनके मूल स्वरूप में विकसित करने की दिशा में प्रभावी कार्रवाई की जाए।

निरीक्षण के दौरान अपर जिलाधिकारी के साथ उपजिलाधिकारी निखिल राजपूत, तहसीलदार अविनाश कुमार तथा नगर पंचायत के अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने तालाबों की भूमि, सीमाओं और वहां बने स्थायी व अस्थायी निर्माणों की भी जानकारी ली। प्रशासन ने तालाब की भूमि पर किए गए अतिक्रमण को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई के संकेत दिए हैं।

अपर जिलाधिकारी ने निर्देशित किया कि तालाब की भूमि पर स्थायी रूप से किए गए अतिक्रमण, जैसे छज्जे, दीवार, चबूतरे एवं अन्य निर्माणों को संबंधित लोग स्वयं हटा लें, ताकि तालाब की भूमि को कब्जामुक्त कराया जा सके।

उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जलस्रोतों पर अतिक्रमण किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है और नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासन की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि जिन मामलों को लेकर न्यायालय में वाद विचाराधीन हैं, उनमें न्यायालय के निर्णय के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अन्य स्थानों पर चिन्हित अतिक्रमण के विरुद्ध प्रशासनिक स्तर से अभियान चलाकर तालाबों को मुक्त कराने की तैयारी की जा रही है।

अधिकारियों ने कहा कि तालाब केवल जलभराव के स्थान नहीं हैं, बल्कि भूजल स्तर को बनाए रखने, वर्षा जल संचयन और पर्यावरण संतुलन में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। लगातार घटते भूजल स्तर और जल संकट को देखते हुए पारंपरिक जलस्रोतों का संरक्षण समय की बड़ी जरूरत बन गया है।

प्रशासन ने नागरिकों से भी तालाबों के संरक्षण में सहयोग की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि प्रशासनिक प्रयासों के साथ यदि स्थानीय नागरिक भी जलस्रोतों को स्वच्छ और अतिक्रमणमुक्त रखने में भागीदारी करें तो आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी और पर्यावरण दोनों को सुरक्षित रखा जा सकता है।

हिन्दुस्थान समाचार / सुनील कुमार

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