जेल में सात साल से बंद पूर्व मंत्री कमलेश पाठक को रंगदारी मामले में मिली जमानत, फिलहाल नहीं आएंगे बाहर

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जेल में सात साल से बंद पूर्व मंत्री कमलेश पाठक को रंगदारी मामले में मिली जमानत, फिलहाल नहीं आएंगे बाहर


औरैया, 20 जून (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की आगरा जेल में पिछले सात वर्षों से बंद पूर्व विधायक और पूर्व मंत्री कमलेश पाठक को रंगदारी और धमकी के एक मामले में अदालत से शनिवार को राहत मिली है। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट/अपर सिविल जज (सीडी) कोर्ट ने उन्हें 50 हजार रुपये के मुचलके और निजी बंधपत्र पर जमानत दी है। हालांकि, अन्य मामलों में निरुद्ध होने के कारण फिलहाल उनकी जेल से रिहाई नहीं हो सकेगी।

यह मामला 7 जनवरी 2020 को औरैया कोतवाली में दर्ज कराया गया था। संकटमोचन गली निवासी राजेश कुमार ने आरोप लगाया था कि पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक और अब्दुल सत्तार उनसे पिछले सात वर्षों से हर महीने 50 हजार रुपये की रंगदारी मांग रहे थे। शिकायत के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 308(5) और 351(2) के तहत मुकदमा दर्ज किया था।

जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान कमलेश पाठक के अधिवक्ता सौरभ पांडेय ने अदालत में दलील दी कि उनके मुवक्किल 16 मार्च 2020 से आगरा जेल में बंद हैं। जेल मैनुअल के अनुसार, सांसद और विधायक श्रेणी के बंदी को केवल दो लोगों से बातचीत की अनुमति होती है, जिनमें अब्दुल सत्तार शामिल नहीं हैं। ऐसे में रंगदारी मांगने के आरोप तथ्यात्मक रूप से कमजोर है।

बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि केस डायरी और पत्रावली में रंगदारी वसूली या जेल से सीधे संपर्क करने का कोई ठोस साक्ष्य मौजूद नहीं है।

वहीं अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए अदालत को बताया कि कमलेश पाठक के खिलाफ पहले से 39 मुकदमे दर्ज हैं और उनके द्वारा जमानत की शर्तों का उल्लंघन किए जाने की आशंका है।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपने आदेश में कहा कि पत्रावली में रंगदारी मांगने का कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं मिला है। साथ ही जेल में बंद व्यक्ति द्वारा सीधे तौर पर संपर्क स्थापित करना भी सहज नहीं माना जा सकता। इसके आधार पर अदालत ने कमलेश पाठक को 50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत देने का आदेश पारित किया।

उल्लेखनीय है कि कमलेश पाठक वर्ष 2020 के चर्चित डबल मर्डर केस में पहले से आगरा जेल में बंद हैं। इसके अलावा उनके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट सहित अन्य मामले भी लंबित हैं। ऐसे में इस मुकदमे में जमानत मिलने के बावजूद उनकी जेल से रिहाई फिलहाल संभव नहीं होगी।

उधर, कमलेश पाठक पक्ष का कहना है कि शिकायतकर्ता राजेश कुमार से उनकी पुरानी रंजिश चली आ रही है। वर्ष 2021 में राजेश कुमार ने कमलेश पाठक की पत्नी मधु पाठक और अब्दुल सत्तार के खिलाफ जमीन कब्जाने का मुकदमा दर्ज कराया था। बचाव पक्ष का आरोप है कि इसी पुरानी रंजिश के चलते रंगदारी का यह मुकदमा दर्ज कराया गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील कुमार

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