दिल्ली बिल्डिंग हादसे में खाेया औरैया का लाल : रक्षाबंधन पर बांधी थी राखी, चंद दिन बाद छिन गयीं खुशियां, बहन ने दी भाई को मुखाग्नि

WhatsApp Channel Join Now
दिल्ली बिल्डिंग हादसे में खाेया औरैया का लाल : रक्षाबंधन पर बांधी थी राखी, चंद दिन बाद छिन गयीं खुशियां, बहन ने दी भाई को मुखाग्नि


-रक्षाबंधन पर बांधी थी राखी, मंगलवार को बहन ने दी भाई को मुखाग्नि

-दिल्ली हॉस्टल हादसे में पवन की मौत से दिबियापुर में पसरा मातम, चार बहनों के इकलौते भाई की अंतिम विदाई में उमड़ा जनसैलाब

औरैया, 08 सितम्बर (हि. स.)। उत्तर प्रदेश के औरैया जनपद के दिबियापुर कस्बे में जिस घर में कुछ दिन पहले रक्षाबंधन की खुशियां थीं, मंगलवार को वहां मातम पसरा था। रक्षाबंधन पर चारों बहनों ने जिस इकलौते भाई पवन कुमार की कलाई पर राखी बांधकर उसकी लंबी उम्र की कामना की थी, मंगलवार को उसी भाई की अर्थी उठी। भाई के अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग उमड़ पड़े। चारों बहनों की चीख-पुकार और परिवार का दर्द देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं। दिल्ली में पीजी हॉस्टल हादसे में युवक की जान चली गयी।

दिबियापुर कस्बे के कैलाश बाग दयाराम नगर निवासी सेवानिवृत्त होम्योपैथी फार्मासिस्ट विशंभर सिंह के इकलौते बेटे पवन कुमार की दिल्ली में पांच मंजिला हॉस्टल की इमारत गिरने से मौत हो गई थी। हादसे में जान गंवाने वाले छह छात्रों में पवन भी शामिल था। देर रात पोस्टमार्टम के बाद पवन का शव घर पहुंचा तो परिवार में कोहराम मच गया। चारों बहनें भाई के शव से लिपटकर बिलखती रहीं। मां मीरा देवी की हालत देखकर हर कोई परेशान था, जबकि पिता बेटे के गम में बेसुध नजर आए।

मंगलवार को पवन की अंतिम यात्रा घर से निकली तो बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। कस्बे के मुक्ति धाम में अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू होते ही माहौल बेहद गमगीन हो गया। परिजनों और परिचितों की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। सबसे मार्मिक दृश्य उस समय सामने आया, जब पवन की बहन प्रियांशी ने अपने भाई को मुखाग्नि दी। कुछ दिन पहले जिस बहन ने रक्षाबंधन पर भाई की कलाई पर राखी बांधी थी, उसी बहन को मंगलवार को भाई की अंतिम विदाई की रस्म निभानी पड़ी। यह दृश्य देखकर मुक्ति धाम में मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं। चारों बहनों के लिए पवन केवल उनका भाई ही नहीं, बल्कि परिवार की खुशियों का केंद्र था। भाई की अर्थी को अंतिम विदाई देते समय बहनों के चेहरे पर दिखाई दे रहा दर्द ऐसा था, जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल था। परिवार के इकलौते बेटे की मौत ने पूरे दिबियापुर कस्बे को गमगीन कर दिया।

--------------

हिन्दुस्थान समाचार / सुनील कुमार

Share this story