मीरजापुर के लाल ने सिक्किम तक बढ़ाया मान, डॉ. चंद्रकांत बने स्किल यूनिवर्सिटी के कुलपति

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मीरजापुर के लाल ने सिक्किम तक बढ़ाया मान, डॉ. चंद्रकांत बने स्किल यूनिवर्सिटी के कुलपति


मीरजापुर, 20 अगस्त (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के मीरजापुर जिले में नारायनपुर क्षेत्र के शेरपुर गांव से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने वाले डॉ. चंद्रकांत त्रिपाठी ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। पं. मुरलीधर त्रिपाठी के पुत्र डॉ. चंद्रकांत त्रिपाठी को सिक्किम स्किल यूनिवर्सिटी के कुलपति का दायित्व सौंपा गया है।

उन्होंने कुलपति पद का कार्यभार ग्रहण कर लिया है। उनकी इस उपलब्धि से क्षेत्र में खुशी की लहर है और गांव के लोग खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।

साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से निकलकर ऊंचा मुकाम हासिल करने वाले डॉ. त्रिपाठी इससे पहले भारत सरकार की संस्था केंद्रीय हिंदी संस्थान में करीब 25 वर्षों तक रजिस्ट्रार के पद पर सेवाएं दे चुके हैं। प्रशासनिक अनुभव के साथ साहित्य, पत्रकारिता और रंगमंच में भी उनकी गहरी रुचि रही है।

डॉ. त्रिपाठी की उपलब्धियों का दायरा देश की सीमाओं तक ही सीमित नहीं है। वे जापान, अमेरिका, चीन, रूस और श्रीलंका समेत कई देशों की यात्रा कर चुके हैं। उन्होंने विभिन्न विषयों पर कई पुस्तकों का लेखन भी किया है। उनकी एक पुस्तक को भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय की ओर से पुरस्कार मिल चुका है।

दिलचस्प बात यह है कि शिक्षा और साहित्य की दुनिया में पहचान बनाने वाले डॉ. त्रिपाठी का रंगमंच और सिनेमा से भी जुड़ाव रहा है। उन्होंने भोजपुरी फिल्म ‘गंगा घाट’ में चर्चित अभिनेता सुजीत कुमार के साथ अभिनय किया था। हिंदी पत्रकारिता में भी उनकी विशेष रुचि रही है। डॉ. त्रिपाठी की इस उपलब्धि पर प्रो. अशोक सिंह, डा. राममोहन आस्थाना, डा. ओपी तिवारी व शेरपुर सहित पूरे नारायनपुर क्षेत्र में लोगों ने हर्ष व्यक्त किया है।

अब सिक्किम में कौशल शिक्षा को नई उड़ान देने का लक्ष्य

कुलपति का दायित्व संभालने के बाद डॉ. चंद्रकांत त्रिपाठी ने सिक्किम स्किल यूनिवर्सिटी को गुणवत्तापूर्ण, रोजगारपरक और कौशल आधारित शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर की अग्रणी संस्था बनाने का लक्ष्य रखा है। वे उद्योग जगत और प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों के साथ सहयोग बढ़ाने, आधुनिक तकनीक एवं नवाचार को बढ़ावा देने, विद्यार्थियों के प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर बढ़ाने तथा शोध को प्रोत्साहित करने पर जोर देंगे। उनका उद्देश्य है कि विश्वविद्यालय के विद्यार्थी केवल डिग्री लेकर न निकलें, बल्कि ज्ञान, कौशल और आत्मविश्वास से लैस होकर देश-विदेश में अपनी अलग पहचान बनाएं

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हिन्दुस्थान समाचार / गिरजा शंकर मिश्रा

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