डेनमार्क के राजदूत ने 258 गांवों की प्यास बुझाने वाली व्यवस्था का जाना राज
मीरजापुर, 15 सितंबर (हि.स.)। गांव के नल तक पहुंचने वाले पानी की पूरी यात्रा मंगलवार को डेनमार्क के राजदूत रासमुस अबिल्डगार्ड क्रिस्टेंसन ने करीब से समझा। उन्होंने लालगंज के नरैना कला स्थित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से लेकर गांव की टोटी तक जलापूर्ति व्यवस्था का निरीक्षण किया। दुहौआ गांव में आयोजित ‘जल अर्पण’ समारोह में ग्रामीण जलापूर्ति योजना को समुदाय को सौंपते हुए उन्होंने कहा कि पानी की सुरक्षा केवल सरकारी व्यवस्था से नहीं, बल्कि लोगों की सक्रिय भागीदारी से ही संभव है।
राजदूत ने वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में बेलन नदी से लिए जाने वाले पानी के शोधन, संचालन और एससीएडीए प्रणाली की जानकारी ली। यह संयंत्र जल जीवन मिशन के तहत 258 गांवों को उपचारित पानी उपलब्ध करा रहा है। इसके बाद उन्होंने परसिया स्थित ओवरहेड टैंक का निरीक्षण कर पंप संचालक से गांवों तक पानी पहुंचाने की प्रक्रिया समझी। ‘जल बंधन’ गतिविधि में भाग लेने के साथ परिसर में पौधारोपण भी किया।
दुहौआ में आयोजित समारोह में 400 से अधिक ग्रामीण, विशेषकर महिलाएं शामिल हुईं। बच्चों ने जल वंदना और ‘जल बिना भविष्य’ विषय पर लघु नाटिका प्रस्तुत कर पानी बचाने का संदेश दिया। जल शृंगार के बाद योजना का सामुदायिक हस्तांतरण किया गया और ग्रामीणों को जल संरक्षण की सामूहिक शपथ दिलाई गई।
अपर जिलाधिकारी नमामि गंगे विजेता ने कहा कि मीरजापुर की दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों में ग्रामीण क्षेत्रों तक पेयजल पहुंचाना चुनौतीपूर्ण है। यूएनओपीएस के सहयोग से जिले में पानी की उपलब्धता और पहुंच में सुधार हुआ है। उन्होंने जल सुरक्षा में ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों और स्थानीय समुदाय की भूमिका को अहम बताया।
यूएनओपीएस इंडिया के कंट्री मैनेजर विनोद मिश्रा ने कहा कि जल सुरक्षा के लिए पानी की उपलब्धता, पहुंच और गुणवत्ता तीनों पर बराबर ध्यान देना जरूरी है। समारोह में जल सखियों ने राजदूत का स्वागत किया और जल गुणवत्ता परीक्षण का लाइव प्रदर्शन किया।
राजदूत ने कहा कि भारत और डेनमार्क जल संसाधनों के सतत और कुशल प्रबंधन की जरूरत पर एकमत हैं। जल जीवन मिशन का समर्थन दोनों देशों की गहरी और भरोसेमंद साझेदारी को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि जिन समुदायों का जीवन पानी पर निर्भर है, उन्हें जल सुरक्षा की जिम्मेदारी में सक्रिय भागीदार बनाना जरूरी है।
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हिन्दुस्थान समाचार / गिरजा शंकर मिश्रा

