उप्र में 7955 राजस्व वादों को त्वरित निस्तारण करें जिलाधिकारी: चकबन्दी आयुक्त

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लखनऊ, 02 जून (हि.स.)। चकबन्दी आयुक्त डा. हृषिकेश भास्कर यशोद ने मंगलवार को चकबंदी प्रक्रिया के अन्तर्गत प्रचलित गांवों की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने कहा कि वर्षों से लम्बित चकबंदी कार्रवाई को पूर्ण कराते हुए प्रत्येक दशा में एक वर्ष के अंदर धारा 52 के प्रकाशन की कार्रवाई समाप्त करते हुए चकबंदी प्रक्रिया को समाप्त की जाए।

उन्होंने बताया कि प्रारम्भिक चकबंदी योजना धारा-4 के अधिसूचित होने के पूर्व से ही ग्राम सभा की भूमियों पर कतिपय अराजकतत्वों द्वारा अवैध कब्जा और अतिक्रमण किया गया होता है।

अतिक्रमित भूमियों को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा-67 के अधीन वाद पंजीकृत होते हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश के 38 जनपदों के 71 चकबंदी गांवों से संबंधित तहसील स्तर पर विभिन्न राजस्व न्यायालयों में राजस्व संहिता की धारा-67 के अन्तर्गत 7955 वाद विचाराधीन हैं, जिससे चकबंदी कार्य को पूर्ण करने में विलम्ब हो रहा है।

उन्होंने कहा कि प्रायः यह देखा गया है कि अनाधिकृत कब्जे से बेदखल होने के भय से अतिक्रमणकर्ता द्वारा चकबन्दी प्रक्रिया का विरोध किया जाता है, जिससे चकबंदी प्रक्रिया बाधित होती है तथा कृषकों का हित भी प्रभावित होता है।

उन्होंने प्रदेश के समस्त जिलाधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि वे अपने-अपने जिले के तहसीलों में चकबंदी प्रक्रियाधीन ग्रामों में धारा-67 के अन्तर्गत पंजीकृत राजस्व वादों की समीक्षा करते हुए विचाराधीन वादों को प्राथमिकता के आधार पर समयबद्धढंग से गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के लिए प्रभावी अनुश्रवण एवं पर्यवेक्षण करना सुनिश्चित करें।

उन्होंने बताया कि राजस्व वादों के निस्तारण से ग्राम समाज, सार्वजनिक भूमि से अवैध कब्जा, अतिक्रमण से अवमुक्त किया जा सकेगा और चकबंदी प्रक्रिया को गति मिलेगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / दीपक

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