डीसी लॉ कॉलेज में प्रवेश और परीक्षा की गड़बड़ी पर सख्त है विश्वविद्यालय : प्रो. विनय कुमार पाठक

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डीसी लॉ कॉलेज में प्रवेश और परीक्षा की गड़बड़ी पर सख्त है विश्वविद्यालय : प्रो. विनय कुमार पाठक


कानपुर, 28 अक्टूबर (हि.स.)। विश्वविद्यालय परीक्षा में पारदर्शिता बनाए रखने और प्रवेश नियमों का पालन कराने के लिए गंभीर है। डीसी लॉ कॉलेज में परीक्षा केंद्र, प्रथम वर्ष के प्रवेश और 90 दिनों के अनिवार्य पाठ्यक्रम से जुड़े मामलों में नियमानुसार निर्णय लिए जा रहे हैं। यह बातें बुधवार को छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहीं।

कुलपति ने डीसी लॉ कॉलेज में होम सेंटर पर परीक्षा कराने की मांग पर कहा कि नकलविहीन और व्यवस्थित परीक्षा के लिए केंद्र बदले जाते हैं। यह प्रक्रिया विश्वविद्यालय की नियमावली के अनुसार अपनाई जाती है। मूल्यांकन के बाद उत्तरपुस्तिकाओं की प्रतियां विद्यार्थियों के ई-मेल पर भेजी जाती हैं। किसी छात्र को मूल्यांकन में गड़बड़ी की शिकायत होती है तो विश्वविद्यालय उससे संवाद करेगा और जरूरत पड़ने पर उत्तरपुस्तिका की दोबारा जांच कराई जाएगी।

प्रश्नपत्र निर्माण में एआई और विशेषज्ञों की भूमिका

प्रो. पाठक ने कहा कि प्रश्नपत्र तैयार करने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के साथ विषय विशेषज्ञों की भी भूमिका है। मॉडरेटर की निगरानी में एआई की मदद से प्रश्नपत्रों के कई सेट तैयार किए जाते हैं। इस प्रक्रिया में तकनीक के साथ मानवीय विशेषज्ञता का भी इस्तेमाल किया जाता है।

जांच पूरी होने तक नहीं खुलेगा समर्थ पोर्टल

डीसी लॉ कॉलेज में प्रथम वर्ष के प्रवेश को लेकर कुलपति ने कहा कि कॉलेजों में शासन के नियमों के अनुसार मेरिट और आरक्षण के आधार पर दाखिले होने चाहिए। विश्वविद्यालय को शिकायत मिली थी कि डीसी लॉ कॉलेज में प्रवेश के दौरान मेरिट और आरक्षण के नियमों का पालन नहीं किया गया। इस मामले में विश्वविद्यालय की ओर से गठित समिति ने कॉलेज के प्राचार्य से संबंधित दस्तावेज मांगे हैं। अभी तक मेरिट सूची और अन्य जरूरी अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। जांच पूरी होने तक समर्थ पोर्टल पर आवेदन जमा करने की प्रक्रिया शुरू नहीं होगी।

90 दिन के पाठ्यक्रम पर विचार कर रहा परीक्षा विभाग

बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के 90 दिनों की अनिवार्य शैक्षणिक अवधि के नियम पर कुलपति ने कहा कि कक्षाओं की निर्धारित अवधि के साथ पढ़ाई के घंटों का भी महत्व है। जहां देर से प्रवेश हुए हैं, वहां निर्धारित पाठ्यक्रम पूरा कराने और इसके लिए कक्षाओं के संचालन की अवधि तय करने पर विश्वविद्यालय का परीक्षा विभाग विचार कर रहा है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए सभी मामलों में नियमानुसार निर्णय लिए जाएंगे।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

Livevns.news Desk
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