बिजली के निजीकरण के विरोध में संयुक्त किसान मोर्चा ने किया प्रदेशव्यापी धरना प्रदर्शन

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बिजली के निजीकरण के विरोध में संयुक्त किसान मोर्चा ने किया प्रदेशव्यापी धरना प्रदर्शन


लखनऊ, 27 अप्रैल (हि.स.)। संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर सोमवार को पूरे प्रदेश के सभी जनपदों एवं तहसीलों में किसानों ने बिजली के निजीकरण के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। साथ ही निजीकरण की प्रक्रिया को तत्काल निरस्त करने की मांग उठाई। राजधानी लखनऊ में हुए प्रदर्शन का नेतृत्व उप्र विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के प्रांतीय संयोजक शैलेन्द्र दुबे तथा संयुक्त किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष एकादशी यादव ने किया। इस दौरान सदर तहसील, लखनऊ में उपजिलाधिकारी को मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा गया।

ज्ञापन में प्रमुख रूप से मांग की गई कि बेमौसम बारिश, तेज हवाओं एवं ओलावृष्टि से नष्ट हुई फसलों का किसानों को समुचित मुआवजा दिया जाए, पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण का निर्णय और उसकी प्रक्रिया तत्काल निरस्त की जाए। बिजली कर्मचारियों के आंदोलन के दमन को लेकर की जा रही उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों को समाप्त किया जाए तथा स्मार्ट मीटर में उपभोक्ताओं की सहमति के बिना लागू की गई प्रीपेड व्यवस्था को समाप्त कर पूर्व की पोस्टपेड व्यवस्था बहाल की जाए। साथ ही किसानों एवं मजदूरों को सस्ती और सुलभ बिजली उपलब्ध कराने की भी मांग उठाई गई।

सदर तहसील परिसर में क्रांतिकारी किसान यूनियन एवं अन्नदाता किसान यूनियन के संयुक्त बैनर तले बड़ी संख्या में किसान एकत्र हुए और जोरदार नारेबाजी करते हुए निजीकरण पर पूर्ण रोक, फसल क्षति का मुआवजा तथा मजदूरों पर हो रहे दमन को तत्काल बंद करने की मांग की। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो प्रदेशभर में चरणबद्ध और व्यापक आंदोलन किया जाएगा।

इस अवसर पर मुख्य वक्ता शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि प्रदेश में 500 से अधिक दिनों से बिजली कर्मचारी निजीकरण के खिलाफ आंदोलनरत हैं। यह संघर्ष केवल कर्मचारियों का नहीं, बल्कि किसानों, मजदूरों और आम उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा का आंदोलन है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिजली व्यवस्था के निजी हाथों में जाने से दरों में भारी वृद्धि होगी और गरीब एवं ग्रामीण उपभोक्ताओं की पहुंच से बिजली दूर हो जाएगी।

संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने कहा कि प्रीपेड स्मार्ट मीटर योजना पूरी तरह विफल साबित हुई है, जिससे उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ और तकनीकी समस्याएं बढ़ी हैं। उन्होंने सरकार से इस योजना को समाप्त कर सरल एवं पारदर्शी मीटरिंग व्यवस्था लागू करने की मांग की।

इधर, विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने 16 अप्रैल से चलाए जा रहे जन-जागरण अभियान के अंतर्गत आज जवाहरपुर ताप विद्युत गृह एवं कासगंज-एटा में विरोध सभाएं आयोजित की गईं। इन सभाओं को संघर्ष समिति के प्रमुख पदाधिकारी जितेंद्र सिंह गुर्जर, महेंद्र राय, मोहम्मद वसीम एवं आर सी पाल ने संबोधित किया। सभाओं में पनकी एवं जवाहरपुर ताप विद्युत गृहों के परिचालन एवं अनुरक्षण कार्य को यूनिफाइड टेंडर के माध्यम से निजी कंपनियों को सौंपे जाने के प्रस्ताव का जोरदार विरोध किया गया।

संघर्ष समिति ने घोषणा की कि 13 मई को प्रदेश के सभी ऊर्जा निगमों में व्यापक विरोध प्रदर्शन किया जाएगा तथा कर्मचारी पूरे दिन काली पट्टी बांधकर कार्य करेंगे। इस संबंध में प्रबंधन को नोटिस भी सौंप दिया गया है।

कार्यक्रम में संघर्ष समिति के पी. के. दीक्षित सहित विभिन्न किसान संगठनों के पदाधिकारी—विशंभर दयाल, दिनेश कुमार रावत, गोकर्ण यादव, मोहम्मद हफीज, मुकेश कुमार, जगदीश प्रसाद, ब्रह्मा देवी, फरीदा, मंजू गौतम, काशीराम गौतम, विवेक कुमार, रामप्रकाश पाल, हनुमान पाल, गिरजा शंकर तिवारी, मनीराम रावत आदि बड़ी संख्या में किसान एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / मोहित वर्मा

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