विधानसभा का उपयोग जनता की सेवा और लोकतांत्रिक मूल्यों को सशक्त बनाने के लिए करें विधायक : सतीश महाना

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विधानसभा का उपयोग जनता की सेवा और लोकतांत्रिक मूल्यों को सशक्त बनाने के लिए करें विधायक : सतीश महाना


विधानसभा का उपयोग जनता की सेवा और लोकतांत्रिक मूल्यों को सशक्त बनाने के लिए करें विधायक : सतीश महाना


लखनऊ/कोलकाता, 04 जुलाई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा कि नवनिर्वाचित विधायकों को विधानसभा का उपयोग केवल चर्चा के मंच के रूप में नहीं, बल्कि जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने तथा अपने सार्वजनिक जीवन की विश्वसनीयता और जनस्वीकार्यता को बढ़ाने के सशक्त माध्यम के रूप में करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि जितना अधिक जनता का विश्वास अर्जित करेगा, उतनी ही सहजता और प्रभावशीलता से वह अपने क्षेत्र तथा प्रदेश के विकास के लिए कार्य कर सकेगा।

महाना पश्चिम बंगाल विधानसभा में लोकसभा सचिवालय के संसदीय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (PRIDE) तथा पश्चिम बंगाल विधानसभा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित नवनिर्वाचित विधानसभा सदस्यों के दो दिवसीय ओरिएंटेशन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक विधायक का दायित्व है कि वह संविधान की मूल भावना और लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप कार्य करे। संविधान केवल अधिकारों का दस्तावेज नहीं, बल्कि कर्तव्यों के निर्वहन की भी प्रेरणा देता है। जनप्रतिनिधियों को अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों का भी समुचित ज्ञान होना चाहिए।

विधानसभा समितियों की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए महाना ने कहा कि सदन की विभिन्न समितियां जनहित के अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर गंभीरतापूर्वक कार्य करती हैं। यदि विधायक इन समितियों का प्रभावी उपयोग करें तो जनता की समस्याओं का समाधान अधिक परिणामकारी ढंग से किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सदन में सक्रिय, सकारात्मक और सार्थक सहभागिता ही किसी विधायक की वास्तविक पहचान बनाती है।

लोकतांत्रिक व्यवस्था की व्याख्या करते हुए महाना ने कहा कि संवैधानिक व्यवस्था एक कुर्सी के चार पायों के समान है। यदि इनमें से एक भी पाया कमजोर हो जाए तो पूरी व्यवस्था असंतुलित हो जाती है। इसलिए विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका तथा अन्य लोकतांत्रिक संस्थाओं को संविधान की मर्यादाओं के अनुरूप अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनहित के कार्यों में यदि कोई अनावश्यक बाधा उत्पन्न करता है तो विधायिका को विशेषाधिकार जैसी संवैधानिक व्यवस्थाएं भी प्राप्त हैं, जिनका उद्देश्य सदन की गरिमा और अधिकारों की रक्षा करना है।

अपने संसदीय और प्रशासनिक अनुभव साझा करते हुए महाना ने कहा कि मंत्री और जनप्रतिनिधि के रूप में उन्होंने सदैव प्रदेश के विकास के साथ-साथ अपने विधानसभा क्षेत्र के विकास को भी समान महत्व दिया। उन्होंने नवनिर्वाचित विधायकों से आह्वान किया कि वे जनता से सतत संवाद बनाए रखें तथा अपने क्षेत्र की समस्याओं के समाधान के लिए निरंतर प्रयासरत रहें।

उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली जैसे प्रखर संसदीय वक्ताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके भाषणों और संसदीय आचरण का अध्ययन प्रत्येक विधायक के लिए प्रेरणादायी है। उनसे संसदीय गरिमा, संवाद की मर्यादा तथा प्रभावी अभिव्यक्ति की कला सीखी जा सकती है।

महाना ने नवनिर्वाचित विधायकों को प्रेरित करते हुए कहा कि अच्छे कार्यों की जानकारी जनता तक पहुंचानी पड़ती है, जबकि गलत कार्य बिना बताए ही लोगों तक पहुंच जाते हैं। इसलिए प्रत्येक जनप्रतिनिधि को अपने आचरण, कार्यशैली और जनसेवा के प्रति सदैव सजग, पारदर्शी एवं उत्तरदायी रहना चाहिए। यही एक सफल जनप्रतिनिधि की सबसे बड़ी पहचान है।

कार्यक्रम में लोकसभा के अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय मंत्री किरण रिजीजू, राज्यसभा उपसभापति हरिवंश पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी, विधानसभा अध्यक्ष रधीन्द्र बोस समेत विभिन्न राज्यों की विधानसभाओं के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं पीठासीन अधिकारी तथा बड़ी संख्या में नवनिर्वाचित विधायक उपस्थित रहे। समापन सत्र के उपरांत सभी गणमान्य अतिथियों ने सामूहिक छायाचित्र सत्र में सहभागिता की।

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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. जितेन्‍द्र पाण्डेय

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