अरण्यकाण्ड का गूढ़ार्थ समझ कर ही होता है ज्ञान-अभयानंद

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अरण्यकाण्ड का गूढ़ार्थ समझ कर ही होता है ज्ञान-अभयानंद


अरण्यकाण्ड का गूढ़ार्थ समझ कर ही होता है ज्ञान-अभयानंद


सीतापुर, 07 अप्रैल (हि.स.)। श्रीरामचरितमानस का अरण्यकांड सबसे अधिक जटिल और गूढ़ है, जिसे समझकर पढ़ने पर ही इसका वास्तविक अर्थ उद्घाटित होता है। यह बात मंगलवार काे श्री तुलसी मानस कथा सेवा संस्थान ट्रस्ट सिधौली, सीतापुर के द्विवार्षिक अधिवेशन ‘मंगल-उत्सव’ में आयोजित श्रीरामकथा (अरण्य काण्ड) के अंतिम सत्र में कथा-व्यास स्वामी अभयानन्द सरस्वती ने कही।

उन्होंने अरण्यकांड का विस्तृत वर्णन करते हुए शबरी प्रसंग की महत्ता बताई और साधकों से आग्रह किया कि वे इसे भावपूर्वक और समझकर पढ़ें। कार्यक्रम में स्वामी प्रकाशानन्द सरस्वती व स्वामी अनन्तानन्द सरस्वती ने कथा-व्यास का माल्यार्पण कर स्वागत किया। व्यास पूजन ट्रस्टी जगत नारायण शुक्ल के परिवार द्वारा किया गया, जिसमें अंगवस्त्र, पगड़ी व स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। समापन अवसर पर रघुवर दयाल शुक्ल व कन्हैयालाल दीक्षित ने धन्यवाद ज्ञापन किया। आयोजन समिति के अध्यक्ष राकेश माहेश्वरी, अध्यक्षा उमा गुप्ता सहित अन्य पदाधिकारियों को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में साध्वी सनातन श्रुति, नगर पंचायत अध्यक्ष गंगाराम राजपूत सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।

कथा-व्यास को मानस वेदान्त सम्मान से किया गया अलंकृत

मंगल उत्सव-2026 के अंतिम सत्र में कथा-व्यास महामंडलेश्वर स्वामी अभयानन्द सरस्वती को प्रतिष्ठित ‘श्रीमानस वेदान्त सम्मान-2026’ से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर ट्रस्ट के सचिव हरिकिंकर जी, संरक्षक स्वामी प्रकाशानन्द सरस्वती, अध्यक्षा उमा गुप्ता सहित सभी ट्रस्टियों ने अंगवस्त्र, स्मृति चिन्ह व श्रीफल भेंट कर पगड़ी पहनाकर उनका अभिनंदन किया। उनके महोली व लखनऊ आश्रमों से आए शिष्यों की भी बड़ी संख्या में उपस्थिति रही।

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हिन्दुस्थान समाचार / Mahesh Sharma

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