भगवान को पाने के लिए सच्ची भक्ति और प्रतीक्षा जरूरी : आचार्य शांतनु महाराज
जौनपुर, 27 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के जौनपुर में नगर के बीआरपी इंटर कॉलेज मैदान में सेवा भारती संस्थान, काशी प्रांत के तत्वावधान में समाजसेवी ज्ञान प्रकाश सिंह के नेतृत्व में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा के सातवें दिन मंगलवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कथा व्यास आचार्य शांतनु महाराज ने भगवान श्रीराम के जीवन दर्शन का वर्णन करते हुए भक्ति, समर्पण और गुरु की महिमा का संदेश दिया।
कथा के दौरान आचार्य शांतनु महाराज ने तीर्थराज प्रयाग में भरद्वाज मुनि के प्रसंग, शबरी को भगवान श्रीराम के दर्शन, अहिल्या उद्धार, चित्रकूट की लीलाओं और राजा दशरथ के महाप्रयाण का भावपूर्ण वर्णन किया। इसके साथ ही माता सीता के त्याग और लव-कुश से जुड़ी कथाओं के माध्यम से श्रद्धालुओं को मर्यादा, त्याग और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।
सच्ची भक्ति से प्रसन्न होते हैं भगवान
आचार्य शांतनु महाराज ने कहा कि भगवान को पाने के लिए सच्ची भक्ति, धैर्य और प्रतीक्षा आवश्यक है। माता शबरी और अहिल्या के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों ने अपने जीवन में प्रभु के प्रति अटूट विश्वास और समर्पण बनाए रखा। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान श्रीराम ने स्वयं उन्हें दर्शन दिए। प्रत्येक भक्त को भी अपने जीवन में ऐसी ही श्रद्धा, निष्ठा और समर्पण की भावना रखनी चाहिए।
गुरु के बिना जीवन अधूरा
गुरु की महिमा का वर्णन करते हुए कथा व्यास ने कहा कि गुरु मनुष्य को सही मार्ग दिखाते हैं और उसके जीवन को सार्थक बनाते हैं। गुरु के मार्गदर्शन के बिना आध्यात्मिक ज्ञान की प्राप्ति कठिन है। उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास रचित रामचरितमानस के प्रसंगों के माध्यम से गुरु के महत्व को समझाया।
चित्रकूट की लीलाओं और राजा दशरथ के महाप्रयाण का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। कथा स्थल पर हजारों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से कथा का श्रवण किया।
हिन्दुस्थान समाचार / विश्व प्रकाश श्रीवास्तव

