एमडीआर शुल्क और जीएसटी के विरोध में व्यापारियों ने किया यूपीआई मशीनों का तर्पण

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एमडीआर शुल्क और जीएसटी के विरोध में व्यापारियों ने किया यूपीआई मशीनों का तर्पण


कानपुर, 09 अक्टूबर (हि.स.)। सरकार ने व्यापारियों को कैशलेस लेनदेन के लिए प्रोत्साहित किया था, लेकिन अब डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क और जीएसटी लगाकर कारोबारियों पर आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। एमडीआर पर 0.4 प्रतिशत शुल्क और उस पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगाने की व्यवस्था व्यापारियों के हित में नहीं है। सरकार को इस फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए, अन्यथा व्यापारी बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। यह बातें शुक्रवार को भारतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के अध्यक्ष ज्ञानेश मिश्रा ने सरसैया घाट पर आयोजित प्रदर्शन के दौरान कही।

सरसैया घाट पर व्यापारियों ने डिजिटल भुगतान पर शुल्क लगाए जाने के विरोध में अनोखे अंदाज में प्रदर्शन किया। संगठन के बैनर तले व्यापारियों ने हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार यूपीआई मशीनों और क्यूआर कोड स्कैनरों का प्रतीकात्मक तर्पण किया। पुरोहित ने मंत्रोच्चारण के बीच तर्पण की रस्म पूरी कराई। इस दौरान एक व्यापारी ने सिर मुंडवाकर भी विरोध जताया।

व्यापारियों ने मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) पर 0.4 प्रतिशत शुल्क और उस पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगाए जाने पर आपत्ति दर्ज कराई। उनका कहना है कि सरकार ने कैशलेस इंडिया के तहत डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दिया था और व्यापारियों को इस व्यवस्था को अपनाने के लिए प्रेरित किया था। अब अतिरिक्त शुल्क लगाने से कारोबारियों के खर्च में बढ़ोतरी होगी।

ज्ञानेश मिश्रा ने कहा कि दीपावली का त्योहार नजदीक है। व्यापारियों को सरकार को कर देने के साथ ग्राहकों को भी राहत देनी होती है। ऐसे में अतिरिक्त शुल्क का बोझ कारोबारियों की जेब पर पड़ेगा और इसका असर व्यापार पर भी होगा। उन्होंने सरकार से डिजिटल लेनदेन से संबंधित शुल्क व्यवस्था की समीक्षा कर व्यापारियों को राहत देने की मांग की। व्यापारियों ने चेतावनी दी कि यदि 14 अक्टूबर तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो वे बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

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