हर क्षेत्रों में नेतृत्व कर रही हैं आज की नारी, नवाचार से युवा गढ़ रहे नया भारत
नोएडा, 20 सितंबर (हि.स.)। गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा में प्रेरणा विमर्श 2026 का आयोजन किया गया। रविवार को आयोजित इस कार्यक्रम की थीम 'उत्कर्ष - नारी सम्मान और युवा स्वाभिमान' था। कार्यक्रम में सृजन संवाद के अंतर्गत 'स्वाभिमानी नारी, सशक्त भारत और युवा सोच, नया भारत विषयों पर लेखक, पत्रकार और प्रबुद्ध विचारकों ने समानांतर चले दो सत्रों में वैचारिक मंथन किया।
अतिथियों के दीप प्रज्ज्वलन और गुरुकुल विद्यार्थियों के स्वस्तिवाचन से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इस दौरान सत्र संयोजक अखिलेश चौधरी ने स्वागत भाषण में कहा कि स्वाभिमानी नारी से ही राष्ट्र का निर्माण होता है प्रथम गुरु मां होती है जिनकी सीख और आचरण से चरित्र का निर्माण होता है। सत्र चर्चा में स्वाभिमानी नारी, सशक्त भारत विषययक सत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख नरेंद्र ठाकुर ने कहा कि परिवार समाज को जोड़ता है। भारतीय संस्कार और परम्पराएं परिवार को जोड़ने का काम करती हैं। नई पीढ़ी तक संस्कारों को ले जाने का कार्य परिवार की महिला की अधिक है। घर की दादी, नानी और चाची इन संस्कारों को आगे बढ़ाती हैं। पुरुषों को महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। दरअसल, परिवार जैसा होगा वैसा समाज बनेगा और वैसा ही राष्ट्र होगा।
इस दौरान प्रसिद्ध योग विशेषज्ञ निवेदिता जोशी ने कहा कि महिलाओं की जिम्मेदारी उनके अधिकारों से तय नहीं होनी चाहिए। महिलाएं ही खाना बनाएंगी, बच्चे पालेंगी; इस सोच को बदलने से ही समाज में बदलाव आएगा। स्वाभाविक रूप से ये बदलाव दिख भी रहा है। शारीरिक शक्ति तभी मिलेगी जब मानसिक शक्ति बेहतर होगी।
चर्चा को आगे बढ़ाते हुए निदेशक, भविष्य प्रौद्योगिकी प्रबंधन निदेशालय रंजना मल्लामल्ली ने कहा कि जब तक परिवार साथ नहीं होता तब तक आप अपना सौ फीसदी नहीं दे सकते। परिवार के साथ सामंजस्य बनाना जरूरी है। महिलाएं स्वास्थ्य का भी ध्यान रखें। आज महिलाएं जय क्षेत्रों में नेतृत्व कर रहीं हैं। तकनीक विशेषज्ञ से लेकर एंटरप्रेन्योर तक है। कहा जाय तो आज का वक्त आधी आबादी के लिए स्वर्ण काल है। आज हर क्षेत्र में नारी की बादशाहत है। अगर कठिन लक्ष्य रखेंगे तो सभी साथ देते हैं।
संसद टीवी एंकर दीक्षा कोहली ने सत्र का संचालन करते हुए कहा कि नई मंत्र एक शब्द नहीं बल्कि उपासना है नई विश्व निर्मात्री है और प्रथम गुरु माँ ही होती है। कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रियंका और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. प्रदीप ने किया।
युवा सोच, नया भारत विषय पर आयोजित समानांतर सत्र में युवा राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति हैं। क्या वे सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं? क्या उनमें समाज और राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध है। एआई के दौर में सकारात्मक सोच और नवाचार के साथ युवाओं को राष्ट्र निर्माण का सशक्त भागीदार कैसे बनाया जए। इन्हीं महत्वपूर्ण विषयों पर विशिष्ट वक्ताओं के साथ सीएमएस गाजियाबाद के प्रो. डॉ. अनिल निगम ने सत्र का संचालन किया।
युवा सोच, नया भारत विषयक सत्र में चर्चा करते हुए आईएमटी ग्रुप ऑफ़ कॉलेज के प्रबंध निदेशक डॉ. मयंक अग्रवाल ने कहा कि युवाओं को वक्त से तालमेल बिठाने के लिए ज्यादा तेज दौड़ना होगा। सीखने की कोई उम्र नहीं होती है, इसलिए समाज में मौजूद ऐसी शख्सियतों से सीखने की जरूरत है, उन्हें प्रेरणास्रोत बनाने की आवश्यकता है।जबकि एनडीटीवी की एंकर रंजना राठौर ने कहा कि युवाओं को समाज में हो रहे बदलावों पर नज़र रखने की जरूरत है। सोशल मीडिया में प्रतिस्पर्धा से दबाव में नहीं आना चाहिए। डिजिटल जागरूकता जरूरी है। सफल व्यक्ति अचीव करता है। जबकि समझदार व्यक्ति पढ़ा लिखा व्यक्ति होता है।
चर्चा में टाइम्स नाउ नवभारत एंकर साक्षी मिश्र ने भाषा की महत्ता पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि मेहनत का कोई विकल्प नहीं है, इसलिए युवाओं को खूब पढ़ने और लिखने की जरूरत है। अपने अनुभव का जिक्र करते हुए उन्होंने भाषा को सीखने की अपनी जिजीविषा भी बताई।इस सत्र का संचालन डॉ. नीलम ने किया और धन्यवाद ज्ञापन प्रो. हरेंद्र सिंह ने किया। वैशाली मित्तल ने युवाओं और नारी शक्ति पर स्वरचित कविता प्रस्तुति की। जबकि वंशिका सेठी ने समापन पर वंदे मातरम का गान किया।
इस मौके पर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के क्षेत्र प्रचार प्रमुख कृपाशंकर, आयोजन समिति प्रेरणा विमर्श - 2026 के अध्यक्ष डॉ. अनिल त्यागी, कार्यकारी अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता, संयोजक श्याम किशोर, सचिव मोनिका चौहान, सत्र संयोजक अखिलेश चौधरी एवं अन्य प्रबुद्धजन रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / सुरेश चौधरी

