किसी भी मुद्दे को समझने के लिए उसके इतिहास को पढ़ना ज़रूरी : मानस गोहीन
कानपुर, 10 जनवरी (हि. स.)। उत्तर प्रदेश के कानपुर जनपद में कल्याणपुर स्थित छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की तरफ से 10 जनवरी को एक ऑनलाइन संवादात्मक सत्र का आयोजन किया गया। इस मौके पर द टाइम्स ऑफ इंडिया के वरिष्ठ सहायक संपादक मानस प्रीतम गोहीन मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। यह जानकारी शनिवार को पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के विभागध्यक्ष डॉ दिवाकर अवस्थी ने दी।
द टाइम्स ऑफ इंडिया के वरिष्ठ सहायक संपादक मानस प्रीतम गोहीन बतौर मुख्य वक्ता ने पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ प्रिंट पत्रकारिता में निष्पक्षता के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि पत्रकारों को यह स्पष्ट रूप से समझना चाहिए कि क्या तथ्य है, क्या दावा है और क्या प्रमाणित है। उन्होंने रिपोर्टिंग में ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा, “किसी भी मुद्दे को समझने के लिए उसके इतिहास को पढ़ना आवश्यक है।”
मानस गोहीन ने पत्रकारों को केवल भाषणबाजी पर निर्भर न रहने की सलाह दी और गहन शोध तथा सतत अध्ययन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने मीडिया पेशे में विविधता के महत्व को रेखांकित करते हुए छात्रों को डेटा विश्लेषण जैसे कौशल विकसित करने के लिए प्रेरित किया, ताकि रिपोर्टिंग को अधिक सशक्त बनाया जा सके।
उन्होंने सत्र के दौरान पत्रकारिता की सार्वजनिक जिम्मेदारी और जनमत निर्माण में उसकी भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई। उन्होंने विश्वसनीय स्रोत विकसित करने और मजबूत पेशेवर नेटवर्क बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
मानस गोहीन ने राजनीतिक पत्रकारिता की वास्तविकताओं पर प्रकाश डालते हुए राजनीतिक एवं सामाजिक मुद्दों की रिपोर्टिंग में आने वाली नैतिक चुनौतियों पर चर्चा की। डिजिटल युग में फैल रही गलत सूचनाओं के संदर्भ में उन्होंने तथ्य-जांच और सत्यापन को पत्रकारिता की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए अनिवार्य बताया। साथ ही, आंदोलनों, लैंगिक मुद्दों और साम्प्रदायिक तनाव जैसे संवेदनशील विषयों की रिपोर्टिंग पर विशेष ध्यान दिया।
पत्रकारिता में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उपयोग को लेकर सतर्कता बरतने की सलाह देते हुए गोहीन ने कहा कि समाचार लेखन के लिए एआई का प्रयोग रचनात्मक और विश्लेषणात्मक सोच को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, उन्होंने जटिल विषयों की व्यापक समझ के लिए एआई को सहायक उपकरण के रूप में स्वीकार किया।
दो घंटे चले इस संवादात्मक सत्र के अंत में गोहीन ने छात्रों को हालिया जेएनयू घटना से संबंधित सामग्री पढ़कर 200 शब्दों की एक समाचार रिपोर्ट लिखने का व्यावहारिक अभ्यास दिया, जिससे वे संवेदनशील मुद्दों की रिपोर्टिंग के मानकों को समझ सकें।
सत्र का संचालन छठे सेमेस्टर की बीजेएमसी छात्रा सौम्या मिश्रा ने किया। कार्यक्रम का समापन विभागाध्यक्ष डॉ. दिवाकर अवस्थी के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। गूगल मीट पर आयोजित इस सत्र में विभाग के शिक्षकगण एवं विद्यार्थियों ने सक्रिय रूप से सहभागिता की।
हिन्दुस्थान समाचार / मो0 महमूद

