डॉ. तीजन बाई ने अपनी अद्भुत साधना से पंडवानी लोककला को विश्व स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाई : डॉ प्रदीप शर्मा

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डॉ. तीजन बाई ने अपनी अद्भुत साधना से पंडवानी लोककला को विश्व स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाई : डॉ प्रदीप शर्मा


मुरादाबाद, 05 जुलाई (हि.स.)। पद्म विभूषण से सम्मानित सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई के आकस्मिक निधन की सूचना पर अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा महानगर मुरादाबाद के द्वारा शोकसभा आयोजित की गई।

वरिष्ठ रंग कर्मी डॉ प्रदीप शर्मा ने कहा कि डॉ. तीजन बाई ने अपनी अद्भुत साधना, विलक्षण प्रतिभा और ओजपूर्ण प्रस्तुति के माध्यम से पंडवानी लोककला को न केवल पूरे भारत में, बल्कि विश्व स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाई।

शिक्षक नेता विमलेंद्र शर्मा 'विमल' ने बताया कि डॉ. तीजन बाई का आज प्रातःकाल लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वे लगभग 70 वर्ष की थीं। उनका गायन महाभारत के पांडवों के जीवन प्रसंगों पर आधारित होता था। प्रस्तुति के दौरान उनके हाथ में रहने वाला तंबूरा कभी तलवार, कभी गदा और कभी धनुष का रूप धारण कर लेता था, जिससे उनका मंचन अत्यंत प्रभावशाली बन जाता था। उनकी बुलंद आवाज, स्वर-साधना तथा आरोह-अवरोह का अद्भुत संतुलन श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देता था।

इस अवसर पर महासभा द्वारा आयोजित शोकसभाा में उपस्थित सभी सदस्यों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की तथा उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की।

श्रद्धांजलि सभा में अनिल शर्मा, सुनील कुमार शर्मा, अमित शर्मा, राजू, शशांक शर्मा, सुनील शर्मा, महेश शर्मा, सौरभ शर्मा, राजेश त्रिपाठी, सतीश, शशि दत्त शर्मा, अभिषेक चतुर्वेदी, सीमा त्रिपाठी, श्वेता शर्मा, उषा शर्मा, रिचा शर्मा सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / निमित कुमार जायसवाल

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