अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही से प्रसव के दौरान हुई थी महिला की मौत ,जांच समिति ने पाया दोषी

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अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही से प्रसव के दौरान हुई थी महिला की मौत ,जांच समिति ने पाया दोषी


गाजियाबाद, 22 अगस्त (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के जनपद गाजियाबाद के लोनी कस्बा के नवजीवन अस्पताल में प्रसव के बाद प्रसूता काजल की मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग की जांच में अस्पताल प्रबंधन की गंभीर लापरवाही सामने आई है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी की ओर से जिलाधिकारी गाजियाबाद को भेजी गई जांच आख्या में चिकित्सीय बोर्ड ने शिकायतकर्ता के आरोपों की पुष्टि की है। बोर्ड ने अस्पताल की ओर से उपलब्ध कराए गए चिकित्सीय अभिलेखों और मेडिकल व पैरामेडिकल स्टाफ के बयानों में अंतर पाया। साथ ही सहमति पत्रों पर प्रसूता और उसके परिजनों के हस्ताक्षर फर्जी होने के आरोप भी सामने आए। जांच समिति ने आशंका जताई है कि काजल के चिकित्सीय अभिलेख बाद में कूटरचित तरीके से तैयार किए गए।

जांच आख्या के अनुसार 27 जुलाई 2026 को काजल को प्रसव के लिए नवजीवन अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 28 जुलाई की सुबह करीब 3:45 बजे सामान्य प्रसव हुआ। प्रसव के बाद काजल को अत्यधिक रक्तस्राव शुरू हो गया। परिजनों का आरोप है कि हालत गंभीर होने के बावजूद समय पर उचित उपचार नहीं दिया गया और उच्च चिकित्सा केंद्र के लिए रेफर करने में भी देरी हुई। बाद में उसे जीटीबी अस्पताल, दिल्ली ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

काजल की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु का कारण अत्यधिक प्रसवोत्तर रक्तस्राव से उत्पन्न सदमा और रक्तस्राव बताया गया है। परिजनों ने अस्पताल की डॉक्टर सुमन त्यागी और अन्य कर्मचारियों पर लापरवाही का आरोप लगाया था।

जांच के दौरान अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. शिखा जोशी ने बताया कि उन्होंने भर्ती के समय काजल को देखा था और बाद में अस्पताल से चले जाने के बाद फोन पर स्टाफ को चिकित्सीय सलाह दी थी। उनके अनुसार प्रसव के समय वह अस्पताल में मौजूद नहीं थीं। वहीं स्टाफ नर्स इसराईल ने बताया कि प्रसव के बाद रक्तस्राव शुरू होने पर डॉक्टर के निर्देश पर जीवन रक्षक दवाएं और इंजेक्शन दिए गए, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद करीब 3:40 बजे मरीज को रेफर किया गया।

जांच में एंबुलेंस को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं मिली। चालक सोनू शर्मा ने बताया कि वह काजल को लेकर जीटीबी अस्पताल गया था और एंबुलेंस में अस्पताल की ओर से कोई कर्मचारी उसके साथ नहीं था। परिजनों ने भी आरोप लगाया कि रेफर किए जाने के दौरान अस्पताल में एंबुलेंस मौजूद नहीं थी और करीब 20 मिनट बाद एंबुलेंस की व्यवस्था हुई।

जांच समिति के अनुसार घटना के बाद 29 जुलाई को अस्पताल के ओटी का निरीक्षण किया गया था, लेकिन काजल के उपचार संबंधी चिकित्सीय अभिलेख उपलब्ध नहीं मिले। बाद में अस्पताल की ओर से दिए गए दस्तावेजों में दर्ज हस्ताक्षरों को काजल के पति, सास और ससुर ने फर्जी बताया। उन्होंने काजल और उसकी मामी के पैन कार्ड पर मौजूद वास्तविक हस्ताक्षर भी जांच समिति को चिकित्सीय बोर्ड ने उपलब्ध दस्तावेजों, बयानों और प्रश्नोत्तर के आधार पर शिकायतकर्ता के आरोपों की पुष्टि की है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सचिन चंद्र वैश्य ने शनिवार काे जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेजते हुए बताया है कि शिकायतकर्ता को जांच से अवगत करा दिया गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुरेश चौधरी

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