युवाओं के विचार और सवालों को मिलेगा मंच : प्रो. विनय कुमार पाठक

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युवाओं के विचार और सवालों को मिलेगा मंच : प्रो. विनय कुमार पाठक


कानपुर, 20 अगस्त (हि.स.)। युवा किसी भी देश की दिशा और दशा तय करने वाली सबसे महत्वपूर्ण शक्ति हैं। विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्रदान करने का स्थान नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व, विचार और दृष्टिकोण को विकसित करने का महत्वपूर्ण केंद्र भी है। तकनीकी बदलाव, डिजिटल माध्यमों के विस्तार और बदलती सामाजिक परिस्थितियों के बीच युवाओं के लिए सही दृष्टिकोण और सकारात्मक सोच जरूरी है। ऐसे संवाद विद्यार्थियों को इन विषयों पर गंभीरता से विचार करने और अपनी भूमिका समझने का अवसर देते हैं। यह बातें गुरुवार काे छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने ‘युवा संवाद’ कार्यक्रम को लेकर कहीं।

विश्वविद्यालय में 25 अगस्त को ‘युवा संवाद’ का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में विचारक एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर मौजूद रहेंगे। वे विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों से सीधे संवाद कर नई पीढ़ी के विचारों, आकांक्षाओं, चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा करेंगे।

कार्यक्रम विश्वविद्यालय के रानी लक्ष्मीबाई सभागार में होगा, जिसमें विभिन्न विभागों के विद्यार्थी सहभागिता करेंगे। इसका उद्देश्य युवाओं को समसामयिक सामाजिक, शैक्षिक और राष्ट्रीय विषयों पर विचार रखने के लिए मंच उपलब्ध कराना है। विद्यार्थियों को मुख्य अतिथि के समक्ष अपने प्रश्न रखने और विचार साझा करने का अवसर भी मिलेगा।

‘युवा संवाद’ को एकतरफा संबोधन के बजाय संवादपरक कार्यक्रम के रूप में आयोजित किया जाएगा। इसमें शिक्षा, तकनीक, नवाचार, सामाजिक सरोकार, युवा नेतृत्व, राष्ट्र निर्माण और बदलते भारत में युवाओं की भूमिका जैसे विषयों पर चर्चा होगी। इसके साथ ही डिजिटल युग में युवाओं की भूमिका, शिक्षा एवं रोजगार की बदलती परिस्थितियों, सामाजिक जिम्मेदारी और युवा शक्ति की भागीदारी जैसे मुद्दे भी संवाद का हिस्सा बन सकते हैं।

कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहा कि कक्षा में पाठ्यक्रम आधारित अध्ययन के साथ विद्यार्थियों को समाज और राष्ट्र से जुड़े व्यापक विषयों पर संवाद का अवसर मिलना उनके दृष्टिकोण को विकसित करता है। इससे नेतृत्व क्षमता, तार्किक सोच और सामाजिक संवेदनशीलता जैसे गुणों को मजबूती मिलती है।

विश्वविद्यालय की ओर से कार्यक्रम को अधिक सहभागितापूर्ण बनाने की तैयारी की जा रही है। विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं और प्रश्नों को संवाद का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जाएगा, ताकि वे अपने अनुभव और विचार साझा कर सकें तथा सकारात्मक वैचारिक वातावरण में नई पीढ़ी से जुड़े मुद्दों पर चर्चा कर सकें।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

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