बुंदेलखंड नव निर्माण सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष को पुलिस ने रोका

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बुंदेलखंड नव निर्माण सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष को पुलिस ने रोका


उपमुख्यमंत्री को एनएच 34 सड़क चौड़ीकरण व डिवाइडर निर्माण के लिए देने जा रहे थे ज्ञापन

हमीरपुर, 26 मई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में बुंदेलखंड नव निर्माण सेना भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनय तिवारी एडवोकेट अपने साथियों के साथ उपमुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार ब्रजेश पाठक को खूनी हाईवे निर्माण, चौड़ीकरण एवं डिवाइडर निर्माण की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपने के लिए राठ पहुंचे थे। जैसे ही विनय तिवारी एवं उनके साथी तहसील गेट राठ पहुंचे, वहां पहले से मौजूद भारी पुलिस बल द्वारा उनकी गाड़ी को घेर लिया गया तथा उन्हें और उनके साथियों को रोककर तहसील परिसर में बैठा लिया गया।

इस पर उन्हाेंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता की समस्याओं को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से ज्ञापन देने से रोकना अत्यंत निंदनीय एवं दुर्भाग्यपूर्ण है। बुंदेलखंड नव निर्माण सेना भारत का मानना है कि जनता की आवाज को प्रशासनिक दबाव से दबाया नहीं जा सकता। ज्ञापन के माध्यम से संगठन द्वारा लगातार हो रही दुर्घटनाओं, बढ़ती मौतों तथा सड़क की बदहाल स्थिति को प्रमुखता से उठाया जाना था। संगठन लंबे समय से हाईवे के चौड़ीकरण, डिवाइडर निर्माण एवं सुरक्षा व्यवस्था की मांग कर रहा है। इस दौरान यश अग्रवाल (निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष), अलका द्विवेदी, इशू, अनुज राजपूत सहित एक दर्जन से अधिक कार्यकर्ता एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे। बुंदेलखंड नव निर्माण सेना भारत ने स्पष्ट किया है कि जनता की सुरक्षा एवं अधिकारों की लड़ाई आगे भी पूरी मजबूती के साथ जारी रहेगी।

पुलिस ने चंद्रकांता राजपूत और परिजनों को किया हाउस अरेस्ट उप्र सरकार के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के राठ आगमन पर पुलिस ने स्वामी ब्रहमानंद विश्वविद्यालय बनाने को लेकर पिछले कई सालों से धरना दे रही चंद्रकांता राजपूत उनके पति शिवरतन सिंह, बड़े भाई केशव प्रसाद लोधी को पुलिस ने हाउस अरेस्ट कर लिया। चंद्रकांता सिंह ने बताया कि पुलिस ने रात एक बजे से ही हमें रोका। ताकि हम अपनी बात शासन-प्रशासन तक न पहुंचा सकें। आरोप लगाया कि जब भी प्रधानमंत्री अथवा उपमुख्यमंत्री आते हैं, हमें ज्ञापन तक नहीं देने दिया जाता। आखिर जनता की आवाज को कब तक दबाया जाएगा। उन्होंने कहा कि मेरा संघर्ष केवल बुंदेलखंड के विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य, शिक्षा और अधिकारों के लिए है। यदि विश्वविद्यालय की मांग उठाना अपराध है तो फिर लोकतंत्र का क्या अर्थ रह जाता है। कहा कि मेरी आवाज को दबाया जा सकता है लेकिन मेरे संघर्ष को नहीं रोका जा सकता।

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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज मिश्रा

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