कानपुर के अन्नदाताओं की बदली तकदीर, खुशहाली की नई इबारत : जिलाधिकारी
-खाद-बीज से लेकर सीधी मदद तक, किसानों के बैंक खातों में पहुंचा 965 करोड़ का सम्मान-रिकॉर्ड तोड़ सरकारी खरीद और 'श्री अन्न' को बढ़ावा, खेती बनी अब फायदे का सौदा
कानपुर, 21 मार्च (हि.स.)। कानपुर नगर में पिछले वर्षों में विकास की गति तेज हुई है। हमारा मुख्य उद्देश्य शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचाना है। चाहे वह किसानों के खातों में सम्मान निधि भेजना हो या रिकॉर्ड स्तर पर धान और गेहूं की खरीद सुनिश्चित करना, प्रशासन पूरी पारदर्शिता के साथ काम कर रहा है। यह बातें शनिवार को जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह ने कही।
पिछले नौ वर्षों में कानपुर के ग्रामीण इलाकों और यहां के किसानों के जीवन में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। योगी सरकार के नेतृत्व में जिले के किसानों को न केवल आर्थिक सुरक्षा मिली है, बल्कि उनके उत्पादों को सही बाजार और दाम दिलाने के लिए भी ठोस कदम उठाए गए हैं।
--सीधे खातों में पहुंची मददसरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जनपद के 2,13,847 किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का सीधा लाभ मिला है। अब तक किसानों के बैंक खातों में 965 करोड़ रुपये की सम्मान राशि भेजी जा चुकी है, जिससे खेती-किसानी की छोटी-मोटी जरूरतों के लिए उन्हें किसी के आगे हाथ फैलाने की जरूरत नहीं पड़ती।
जिले में फसलों की सरकारी खरीद के आंकड़ों में भी जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है। साल 2017 से पहले की तुलना में अब किसानों से उनकी उपज अधिक मात्रा में खरीदी जा रही है।
--खरीद में भारी उछाल
गेहूं की खरीद: 1.23 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर अब 2.68 लाख मीट्रिक टन तक पहुँच गई है। धान की खरीद: इसमें भी रिकॉर्ड वृद्धि हुई है, जो 2.18 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर अब 7.27 लाख मीट्रिक टन हो गई है।मोटा अनाज (श्री अन्न): सरकार ने पारम्परिक खेती को बढ़ावा देते हुए 46 हजार मीट्रिक टन से अधिक 'श्री अन्न' की खरीद की है, जिससे किसानों को मोटे अनाज की खेती के लिए प्रोत्साहन मिला है।
--दुग्ध उत्पादन और सिंचाई में सुधार
किसानों की आय बढ़ाने के लिए सिर्फ फसलों पर ही नहीं, बल्कि डेयरी क्षेत्र पर भी ध्यान दिया गया है। कानपुर में 160.84 करोड़ रुपये की लागत से एक आधुनिक डेयरी और पाउडर प्लांट तैयार किया गया है, जिसकी क्षमता चार लाख लीटर प्रतिदिन है।
वहीं, मनरेगा के तहत नदी पुनर्जीवन और खुदाई कार्यों से 50,000 से अधिक मानव दिवस रोजगार सृजित हुआ है, जिससे एक ओर ग्रामीणों को काम मिला है तो दूसरी ओर खेती के लिए पानी की उपलब्धता भी बेहतर हुई।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

