SRN अस्पताल के नामकरण की मांग ने पकड़ा जोर, 8 अगस्त को धरनास्थल पहुंचेंगे शहीद रोशन सिंह के प्रपौत्र
- प्रयागराज में शहीद रोशन सिंह के सम्मान की लड़ाई तेज, प्रपौत्र शरद सिंह करेंगे धरने को संबोधित
- काकोरी ट्रेन एक्शन के महानायक के नाम पर अस्पताल का नाम रखने की मांग को लेकर तीसरे दिन भी अनिश्चितकालीन धरना जारी
प्रयागराज। काकोरी ट्रेन एक्शन के महानायक अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह के बलिदान स्थल को राष्ट्रीय गौरव दिलाने और स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय (एसआरएन) का नाम उनके नाम पर किए जाने की मांग को लेकर आंदोलन तेज हो गया है। महुआ डाबर संग्रहालय के नेतृत्व में एसआरएन अस्पताल परिसर में चल रहा अनिश्चितकालीन धरना शुक्रवार को लगातार तीसरे दिन जारी रहा। अब शनिवार, 8 अगस्त को ठाकुर रोशन सिंह के प्रपौत्र शरद सिंह मलाका जेल पहुंचकर अपने पुरखे को नमन करेंगे और इसके बाद धरने को संबोधित करेंगे।
छात्र-युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने दिया समर्थन
धरने के तीसरे दिन बड़ी संख्या में छात्र-युवा, सामाजिक कार्यकर्ता और नागरिक एसआरएन अस्पताल परिसर पहुंचे। उन्होंने अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ अस्पताल का नाम उनके नाम पर किए जाने की मांग का समर्थन किया। धरना स्थल पर वक्ताओं ने कहा कि आजादी के अमृत काल और काकोरी ट्रेन एक्शन की शताब्दी के अवसर पर स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारियों और उनके बलिदान स्थलों को उचित पहचान मिलनी चाहिए। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि 9 अगस्त को काकोरी ट्रेन एक्शन दिवस से पहले ठाकुर रोशन सिंह के योगदान और बलिदान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान देने की दिशा में ठोस पहल होनी चाहिए।

मलाका जेल में दी गई थी ठाकुर रोशन सिंह को फांसी
धरने को संबोधित करते हुए महुआ डाबर संग्रहालय के महानिदेशक एवं क्रांतिकारी-शहीद वंशज डॉ. शाह आलम राना ने कहा कि ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ संघर्ष करने वाले महान क्रांतिकारी ठाकुर रोशन सिंह ने प्रयागराज की तत्कालीन मलाका जेल में अपना बलिदान दिया था। उन्होंने कहा कि उस दौर में मलाका जेल को संयुक्त प्रांत की ‘काला पानी’ जेल माना जाता था। डॉ. राना ने कहा कि आज उसी ऐतिहासिक बलिदान स्थल पर स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय स्थापित है। उनका आरोप है कि समय के साथ इस स्थान की क्रांतिकारी विरासत और ठाकुर रोशन सिंह के बलिदान से जुड़ी पहचान धूमिल होती चली गई।
‘SRN का नाम तत्काल ठाकुर रोशन सिंह के नाम पर हो’
डॉ. शाह आलम राना ने कहा कि महुआ डाबर संग्रहालय की प्रमुख मांग है कि स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय का नाम बदलकर अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह के नाम पर रखा जाए। उन्होंने कहा कि काकोरी शताब्दी वर्ष में क्रांतिकारियों के सम्मान और उनकी विरासत को संरक्षित करने की दिशा में गंभीर कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन क्रांतिकारियों ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष करते हुए देश की आजादी के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया, आज उनकी विरासत और स्मृतियों को बचाने के लिए आंदोलन करना पड़ रहा है। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए मांग पूरी होने तक संघर्ष जारी रखने की बात कही।
‘बलिदान स्थलों का संरक्षण बहुत पहले होना चाहिए था’
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता अतुल सिंह चौहान ने कहा कि देश के क्रांतिकारियों से जुड़े बलिदान स्थलों का संरक्षण और उन्हें उचित सम्मान देने का काम काफी पहले हो जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि समाज में इस इतिहास को लेकर व्यापक जन-जागरूकता की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यदि लोगों में पर्याप्त जागरूकता होती तो गोरखपुर, गोंडा और अयोध्या की तरह प्रयागराज में भी ठाकुर रोशन सिंह के बलिदान दिवस पर बड़े आयोजन होते। जन-जागरण के जरिए नई पीढ़ी को क्रांतिकारियों के संघर्ष और बलिदान से परिचित कराने की जरूरत है।
शनिवार को धरनास्थल पहुंचेंगे प्रपौत्र शरद सिंह
महुआ डाबर संग्रहालय के प्रतिनिधि डॉ. अवनीश सिंह ने बताया कि अनिश्चितकालीन धरने के चौथे दिन शनिवार, 8 अगस्त को अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह के प्रपौत्र शरद सिंह प्रयागराज की ऐतिहासिक मलाका जेल (वर्तमान एसआरएन अस्पताल) पहुंचेंगे। यहां वह अपने लड़ाका पुरखे ठाकुर रोशन सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। इसके बाद वह एसआरएन अस्पताल के नामकरण की मांग को लेकर चल रहे धरने में शामिल होकर लोगों को संबोधित करेंगे। उन्होंने नागरिकों, छात्र-युवाओं और सामाजिक संगठनों से सुबह 10 बजे कार्यक्रम में पहुंचने और आंदोलन को समर्थन देने की अपील की।
धरने में ये लोग रहे मौजूद
तीसरे दिन के धरने में निशांत मोदनवाल, हिमांशु सिंह, बालाजी दिनकर, सात्विक सिंह, दीपांश यादव, राघव सिंह, हर्ष मिश्रा, शेर सिंह यादव, आदि पटेल और अमित गिरी समेत अनेक लोग मौजूद रहे। आंदोलनकारियों ने एसआरएन अस्पताल का नाम अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह के नाम पर किए जाने तक अपनी मांग को मजबूती से उठाते रहने की बात कही।

