धर्म को राज्य का आधार बनाने पर अल्पसंख्यकों की स्थिति पाकिस्तान में सुधर नहीं सकती : प्रो. इश्तियाक

धर्म को राज्य का आधार बनाने पर अल्पसंख्यकों की स्थिति पाकिस्तान में सुधर नहीं सकती : प्रो. इश्तियाक
धर्म को राज्य का आधार बनाने पर अल्पसंख्यकों की स्थिति पाकिस्तान में सुधर नहीं सकती : प्रो. इश्तियाक


वाराणसी, 04 अप्रैल (हि.स.)। स्टॉकहोम विश्वविद्यालय, स्वीडन के एमिरेट्स प्रोफेसर इश्तियाक अहमद का मानना है कि यदि भारत और पाकिस्तान का सीमा विवाद सुलझ जाय तो यह पूरे दक्षिण एशिया के विकास और शांति के लिए लाभकारी होगा।

प्रो. इश्तियाक अहमद गुरुवार को बीएचयू मालवीय मूल्य अनुशीलन केन्द्र एवं अन्तर सांस्कृतिक अध्ययन केन्द्र के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित द्वि-दिवसीय विशिष्ट व्याख्यान को सम्बोधित कर रहे थे। 'पाकिस्तान एक सैन्य राज्य : एक स्पष्टीकरण' विषयक व्याख्यान में राजनीतिक विज्ञानी और विचारक प्रो.इश्तियाक ने कहा कि अल्पसंख्यकों की स्थिति पाकिस्तान में तब तक अच्छी नहीं हो सकती है जब तक कि धर्म को राज्य के निर्माण का आधार बनाया जाता रहेगा। इसलिए मजहबी कट्टरता के कारण पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति सदैव खराब रहेगी।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में मोहम्मद अली जिन्ना की मौत के बाद उस पार्टी को आगे ले जाने के लिए कोई प्रभावशाली नेतृत्व नहीं था। यही वजह थी कि कुछ ही समय बाद पाकिस्तान के प्रशासन पर सेना का प्रभाव बढ़ गया। उन्होंने कहा कि मोतीलाल नेहरू रिपोर्ट, मूल अधिकार का करांची घोषणापत्र और पूना पैक्ट इन तीनों का भारत के संविधान पर गहरा प्रभाव पड़ा और आगे चलकर भारत के विकास की यह आधार भूमि बना। पाकिस्तान के निर्माण के प्रारंभ से जिन्ना ने ब्रिटिश सरकार को यह कहा कि पाकिस्तान का निर्माण एशिया में कम्युनिस्ट प्रसार को रोकेगा। इसीलिए वे पाकिस्तान के निर्माण में उनकी मदद करें। पाकिस्तान सदैव अपने वैदेशिक मामलों के लिए पश्चिमी ताकतों पर निर्भर रहा। सोवियत संघ का भय दिखाकर पाकिस्तान अमेरिकानीत गठबंधन पर निर्भर रहा। वहीं, भारत ने 1951 में गुटनिरपेक्ष बने रहने का निर्णय लिया। इन सब कारणों से भारत का एक भिन्न और स्वतंत्र नीतिपरक दृष्टि से विकास हुआ।

व्याख्यान में एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि रूजवेल्ट के निधन के बाद जब विश्व में दो ध्रुव बन गए थे तो भारत ने किसी भी गुट के साथ न जुड़कर अपनी एक स्वतंत्र पहचान बनाई जो यहां की विशेषता और मजबूती का आधार बनी। व्याख्यान की अध्यक्षता प्रो. दीपक मलिक ने की। धन्यवाद ज्ञापन मालवीय मूल्य अनुशीलन केन्द्र के समन्वयक प्रो.संजय कुमार और संचालन डॉ. प्रियंका झा ने किया।

हिन्दुस्थान समाचार/श्रीधर/राजेश

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